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वैश्विक संकेतों के चलते बाजार पर लगातार दूसरे सत्र में दबाव

नई दिल्ली, बांड यील्ड में लगातार वृद्धि के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में दबाव में नजर आया। इस बीच प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 मिले-जुले रुख के साथ सपाट खुले। हालांकि कुछ ही समय बाद बाजार पर और दबाव नजर आया और ये नीचे फिसल गए।

वैश्विक संकेतों के चलते बाजार पर लगातार दूसरे सत्र में दबाव
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नई दिल्ली, बांड यील्ड में लगातार वृद्धि के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में दबाव में नजर आया। इस बीच प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी 50 मिले-जुले रुख के साथ सपाट खुले। हालांकि कुछ ही समय बाद बाजार पर और दबाव नजर आया और ये नीचे फिसल गए।

निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा मौद्रिक नीति के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं, जबकि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।

कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 22,599.05 के स्तर पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से लगभग 4 अंक यानी 0.02 प्रतिशत नीचे था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 72,668 पर खुला और 29.30 अंकों की मामूली बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया।

हालांकि खबर लिखे जाने तक, सेंसेक्स में 492 अंकों यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसने 72,175.95 का दिन का निम्नतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 22,445.70 का इंट्रा-डे लो छुआ, जो 153.35 अंकों यानी 0.67 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

सेक्टोरल प्रदर्शन में निफ्टी आईटी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांक रहे। इनमें 0.59 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टरों में भी हल्की मजबूती देखने को मिली।

दूसरी तरफ निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (एक्स-बैंक) और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स दबाव में रहे और इनमें 0.38 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो शेयरों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई द्वारा अपनाए गए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ सकता है। ऊंची ब्याज दरों के कारण फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बन सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों का झुकाव फार्मास्यूटिकल्स जैसे उन क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है, जिन पर ब्याज दरों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।

बाजार जानकारों के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अभी अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।

उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है।

बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से 6,121 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगभग 4,596 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को कुछ समर्थन दिया।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल एक समेकन (कंसोलिडेशन) के दौर में प्रवेश कर सकता है। निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 23,100 का लक्ष्य अभी भी व्यापक दृष्टिकोण में बरकरार है।

वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों ने बाजारों को प्रभावित किया है। एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को मिश्रित रुख देखने को मिला।


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