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कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद बढ़त के साथ खुला बाजार

मुंबई, अमेरिकी मुद्रास्फीति के उम्मीद से अधिक आंकड़ों, तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला।

कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद बढ़त के साथ खुला बाजार
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मुंबई, अमेरिकी मुद्रास्फीति के उम्मीद से अधिक आंकड़ों, तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 72,965.80 पर खुला, जो अपने पिछले बंद भाव 72,781.89 से 183.91 अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़त को दर्शाता है। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 22,622.70 से 48.59 अंक यानी 0.21 प्रतिशत चढ़कर 22,671.30 पर खुला। हालांकि बाद में दोनों बेंचमार्कों में तेजी और बढ़ गई, और खबर लिखे जाने तक, सेंसेक्स 569.55 अंक यानी 0.78 प्रतिशत चढ़कर 73,351.44 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी ने 22,780.85 का दिन का उच्चतम स्तर छुआ, जो 158.15 अंक या 0.69 प्रतिशत की तेजी को दर्शाता है।

व्यापक बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गई। निफ्टी स्मॉल कैप 100 सूचकांक में 0.60 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी मिड कैप 100 सूचकांक में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेक्टोरल प्रदर्शन मिश्रित रहा। निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाले सूचकांक रहे और इनमें करीब 2 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहने वाला सूचकांक रहा, जिसमें 1 प्रतिशत की गिरावट आई। इसी तरह पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अगस्त में 3.4 प्रतिशत थी। अपेक्षा से अधिक महंगाई बढ़ने के बाद अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावना मजबूत हुई है। विशेषज्ञों ने कहा कि इसी चिंता के कारण अमेरिकी बाजारों में तेज बिकवाली देखने को मिली और टेक्नोलॉजी आधारित नैस्डैक सूचकांक 1.88 प्रतिशत तक टूट गया।

उन्होंने कहा, "इसका असर दक्षिण कोरिया और जापान के बाजारों पर भी पड़ा है। निक्केई 4 प्रतिशत से अधिक और कोस्पी 7 प्रतिशत से ज्यादा नीचे है। हालांकि भारतीय बाजार के नजरिए से एआई शेयरों में आ रहा करेक्शन सकारात्मक माना जा सकता है।" विशेषज्ञों के मुताबिक, जो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयरों को बेचकर एआई शेयरों में निवेश कर रहे थे, उनके इस रुझान पर अब विराम लग सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी ने एक मंदड़िया (बेयरिश) रुझान वाली कैंडल बनाई है, जबकि उसका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 41.66 पर रहा, जो उसके औसत 32.01 से ऊपर है। यह बाजार की गति में कुछ सुधार का संकेत देता है। बुधवार को एफआईआई शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने लगभग 1,857 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत समर्थन देते हुए करीब 2,670 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।

इस बीच, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण बुधवार को वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ बंद हुआ। इसका असर नैस्डैक और एआई शेयरों पर अधिक देखने को मिला। एशियाई बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति जोखिमों और शिपिंग लागत कम करने के लिए अमेरिका के कदमों के संभावित प्रभाव का आकलन कर रहे हैं।


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