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भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन शानदार तेजी

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र मजबूती देखी गई। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,225.07 अंक या 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 76,917.85 और निफ्टी 370.05 अंक या 1.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,810.85 पर बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन शानदार तेजी
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मुंबई, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र मजबूती देखी गई। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,225.07 अंक या 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 76,917.85 और निफ्टी 370.05 अंक या 1.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,810.85 पर बंद हुआ।

बाजार में तेजी को सहारा एफएमसीजी, रियल्टी और खपत से जुड़े शेयरों ने दिया। इसके चलते सूचकांकों में निफ्टी एफएमसीजी 3.65 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 2.33 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 2.29 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर्स थे।

इसके अलावा, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.98 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.71 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.33 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.33 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 1.10 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांकों में शामिल थे।

दूसरी तरफ निफ्टी पीएसयू बैंक -1.27 प्रतिशत, निफ्टी मेटल -0.14 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी -0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 612.85 अंक या 1.06 प्रतिशत की मजबूती के साथ 58,596.25 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 57.55 अंक या 0.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 18,652.85 पर था।

जानकारों ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजारों में सुधार का सिलसिला जारी रहा। कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कमी और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की फिर से बढ़ती दिलचस्पी ने हाल के मैक्रो दबावों को कम किया है। दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजों ने घरेलू विकास के नजरिए पर भरोसा और बढ़ाया है। लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ी है, जिससे वित्तीय और उपभोग-आधारित क्षेत्रों की अगुवाई में बाजार में व्यापक भागीदारी देखने को मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि यह सुधार कितना टिकाऊ होगा, यह कंपनियों के बेहतर नतीजों, एफआईआई के लगातार निवेश, और तेल की कीमतों व वैश्विक यील्ड में नरमी बने रहने पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा भी बाजार के लिए अहम बाहरी कारक बने रहेंगे।


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