Top
Begin typing your search above and press return to search.

भारतीय शेयर बाजार की सपाट शुरुआत

मुंबई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगभग सपाट शुरुआत की।

भारतीय शेयर बाजार की सपाट शुरुआत
X

मुंबई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगभग सपाट शुरुआत की। हालांकि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में दबाव देखने को मिला, लेकिन आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 32.67 अंक यानी 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 78,509.77 अंक पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 8.70 अंक यानी 0.04 प्रतिशत फिसलकर 24,575.10 अंक पर कारोबार शुरू करता दिखाई दिया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप में 0.02 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम इंडेक्स 0.73 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.66 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला।

इसके विपरीत, बैंकिंग शेयरों में दबाव बना रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.64 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.62 प्रतिशत तक गिर गया, जिससे बाजार पर कुछ दबाव बना रहा।

निफ्टी50 इंडेक्स में मैक्स हेल्थ, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, अपोलो हॉस्पिटल, एक्सिस बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और एसबीआई लाइफ सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनियां रहीं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिलहाल इक्विटी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतक, जून तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजे और रुपए में स्थिरता बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है, लेकिन दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की वापसी और बेहतर तिमाही नतीजे बाजार को मजबूती दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में हल्का सकारात्मक रुझान बना रह सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में मजबूत उपभोक्ता मांग वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनियों की आय वृद्धि को समर्थन दे सकती है। साथ ही एफसीएनआर (बी) जमा योजनाओं में मजबूत प्रवाह रुपए को स्थिर रखने में मदद कर सकता है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित होने की संभावना बढ़ेगी।

बाजार जानकारों का यह भी कहना है कि विदेशी निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों से पूंजी निकालकर भारतीय बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह निवेश मुख्य रूप से टेलीकॉम, नवीकरणीय ऊर्जा, कैपिटल गुड्स और फार्मा सेक्टर में आ रहा है, जबकि अपेक्षाकृत आकर्षक वैल्यूएशन वाले बैंकिंग शेयरों में निवेश अभी भी सीमित बना हुआ है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,400-24,450 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 24,750-24,800 का दायरा प्रमुख रेजिस्टेंस बना हुआ है। यदि निफ्टी सपोर्ट स्तरों के ऊपर बना रहता है तो बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रह सकता है और गिरावट पर खरीदारी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर 24,800 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट आने पर तेजी और मजबूत हो सकती है।

वैश्विक बाजारों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.41 प्रतिशत बढ़कर 88.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.47 प्रतिशत बढ़कर 82.52 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता रहा।

अमेरिकी बाजारों में सोमवार को हल्की कमजोरी देखने को मिली थी। एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.06 प्रतिशत और नैस्डैक 0.32 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुए थे।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल घरेलू आर्थिक मजबूती और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन बाजार को सहारा देते नजर आ रहे हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it