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भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद

मुंबई, भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद
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मुंबई, भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 492.70 अंक या 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,235.46 और निफ्टी 132.75 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,154.90 पर था।

बाजार में गिरावट का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ टॉप लूजर था। निफ्टी रियल्टी 1.42 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.01 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 0.77 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.68 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 0.61 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.50 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.29 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 0.40 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.30 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.21 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

लार्जकैप के साथ मिडकैप में दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक या 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,539.40 पर बंद हुआ। हालांकि, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब सपाट 19,808.85 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, एचयूएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा और मारुति सुजुकी लूजर्स थे।

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के सेंटिमेंट पर मुख्य रूप से असर डालती रही। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार में गिरावट को बढ़ाया। अमेरिका-ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की समाप्ति के बाद मध्य पूर्व में सुलह की उम्मीदें धूमिल होने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई और मुद्रास्फीति के फिर से बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी यील्ड में वृद्धि ने उभरते बाजारों के आकर्षण को और कम कर दिया और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई क्योंकि लगातार उच्च ब्याज दरों से ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च में कमी आने की आशंका थी। हालांकि घरेलू बुनियादी कारक अभी भी मजबूत हैं, लेकिन कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें और बढ़ती इनपुट लागत हालिया आय अनुमानों पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे निवेशक निकट भविष्य में सतर्क रहने को प्रेरित हो रहे हैं।


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