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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली, वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी सितंबर माह की 'मंथली इकोनॉमिक रिव्यू' के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत बनी भारतीय अर्थव्यवस्था
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नई दिल्ली, वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी सितंबर माह की 'मंथली इकोनॉमिक रिव्यू' के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है। मंत्रालय का कहना है कि पहली तिमाही में दिखी विकास की रफ्तार दूसरी तिमाही में भी जारी है, हालांकि इसकी गति कुछ संतुलित रहने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण में पेश किए गए नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है, जिससे दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा। इसके बावजूद भारत ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की, जो मौजूदा शृंखला में किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है।

समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि व्यापक आधार पर रही। विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को समर्थन दिया, जबकि निवेश वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा। रिपोर्ट के अनुसार, निवेश दर मौजूदा शृंखला के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।

वित्त मंत्रालय का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा समय पर उठाए गए कदमों ने अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का सीमित असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ने से भी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं।

हालांकि कुछ उच्च आवृत्ति संकेतकों में वृद्धि की रफ्तार पहले की तुलना में थोड़ी धीमी रही। ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई की वृद्धि दर में कुछ नरमी देखी गई। दूसरी ओर अगस्त में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती आई, जिसे नए कारोबार और रोजगार में वृद्धि का समर्थन मिला।

रिपोर्ट के अनुसार, बिजली और ईंधन की खपत लगातार स्वस्थ वृद्धि दर्ज कर रही है, जबकि बैंक ऋण वितरण भी मजबूत बना हुआ है। इससे आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत मिलते हैं।

औद्योगिक क्षेत्र का प्रदर्शन भी पहली तिमाही में मजबूत रहा। वास्तविक औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र ने 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बड़ा योगदान दिया।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं कोर सेक्टर इंडेक्स 4.8 प्रतिशत बढ़ा और अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 52.8 पर रहा, जो विस्तार को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में उद्योग क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी तेजी आई और यह वृद्धि सभी आकार की कंपनियों में व्यापक रूप से देखने को मिली। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत कदमों का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

महंगाई के मोर्चे पर वित्त मंत्रालय ने माना कि वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और मौसम संबंधी अस्थिरता के कारण खुदरा, थोक और उत्पादक स्तर पर मूल्य दबाव बढ़ा है। फिर भी समग्र महंगाई परिदृश्य नियंत्रित बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की टोकरी में शामिल लगभग 69 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर अभी भी 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है।

निर्यात के बारे में समीक्षा में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में भारत का कुल निर्यात मूल्य करीब 400 अरब डॉलर की रफ्तार से बढ़ रहा है। यदि यह गति जारी रहती है, तो पूरे वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह इस बात का मजबूत प्रमाण है कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) निर्यात वृद्धि को गति दे रहे हैं और भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक अवसर पैदा कर रहे हैं।


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