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भारत विदेशी हब पर निर्भरता कम करने के लिए डीप वाटर पोर्ट प्रोजेक्ट्स को देगा बढ़ावा

नई दिल्ली, भारत प्रमुख बंदरगाहों के अपग्रेड और नए गहरे समुद्री टर्मिनलों के निर्माण में तेजी ला रहा है, ताकि वर्तमान में कोलंबो और सिंगापुर के जरिए होने वाले ट्रांसशिपमेंट यातायात को अपने यहां आकर्षित किया जा सके।

भारत विदेशी हब पर निर्भरता कम करने के लिए डीप वाटर पोर्ट प्रोजेक्ट्स को देगा बढ़ावा
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नई दिल्ली, भारत प्रमुख बंदरगाहों के अपग्रेड और नए गहरे समुद्री टर्मिनलों के निर्माण में तेजी ला रहा है, ताकि वर्तमान में कोलंबो और सिंगापुर के जरिए होने वाले ट्रांसशिपमेंट यातायात को अपने यहां आकर्षित किया जा सके। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई।

इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार चेन्नई के निकट एन्नोर स्थित कामराजर बंदरगाह, ओडिशा के पारादीप बंदरगाह और कच्छ के दीनदयाल बंदरगाह सहित कई प्रमुख बंदरगाहों की ड्राफ्ट (जल की गहराई) को 14 मीटर से बढ़ाकर 18 मीटर कर रही है, ताकि वे बड़े "मदर वेसल" (मुख्य मालवाहक जहाज) को संभाल सकें।

दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज (मदर वेसल) एमएससी इरिना के केरल के विझिंजम बंदरगाह पहुंचने को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली सरकारों ने भारत के प्रमुख बंदरगाहों को अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने की अनदेखी की। ऐसे हब इसलिए जरूरी हैं क्योंकि यहां 14,000 से 24,000 टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) क्षमता वाले मदर वेसल ठहर सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, "दशकों तक भारत के समुद्री व्यापार में एक विडंबना रही। 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा और दक्षिणी छोर से गुजरने वाले दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों के बावजूद भारत के पास ऐसे बंदरगाह नहीं थे, जहां मदर वेसल आ सकें।"

रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा इस कमी को दूर करने का संकल्प जताने के एक वर्ष के भीतर ही 7 जुलाई को दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाज एमएससी इरिना के विझिंजम बंदरगाह पहुंची।

वर्षों की इस अनदेखी को अब समस्या के आकार के अनुरूप बड़े पैमाने और तात्कालिकता के साथ दूर किया जा रहा है।

सरकार की मौजूदा योजना के तहत कई प्रमुख बंदरगाहों की ड्राफ्ट गहराई बढ़ाई जा रही है, ताकि वे लगभग 2 लाख टन डेडवेट कार्गो ले जाने वाले केप-साइज ड्राई बल्क जहाजों को संभाल सकें।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि महाराष्ट्र में विकसित किया जा रहा वधावन बंदरगाह लगभग 20 मीटर की प्राकृतिक गहराई और उच्च क्षमता के लक्ष्य के साथ तैयार किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर यह दुनिया के शीर्ष 10 कंटेनर ट्रांसशिपमेंट हब में शामिल हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र में गुजरात का मुंद्रा बंदरगाह, जिसकी ड्राफ्ट गहराई 17.5 मीटर है, पहले ही इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। यह भारत का एकमात्र बंदरगाह है, जहां से 14,000 टीईयू से अधिक क्षमता वाले कंटेनर जहाज सीधे अमेरिका के लिए रवाना होते हैं, जिससे बीच के ट्रांसशिपमेंट हब की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।


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