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जीडीपी : वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत होने पर केंद्र ने किया खारिज

नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े को अच्छा दिखाने के लिए पिछले साल की पहली तिमाही की चालू जीडीपी के आंकड़े को संशोधित करके 86 लाख करोड़ रुपए से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो चालू कीमतों में जीडीपी की ग्रोथ 2.6 प्रतिशत थी।

जीडीपी : वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत होने पर केंद्र ने किया खारिज
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नई दिल्ली, केंद्र सरकार ने बुधवार को उन दावों को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के आंकड़े को अच्छा दिखाने के लिए पिछले साल की पहली तिमाही की चालू जीडीपी के आंकड़े को संशोधित करके 86 लाख करोड़ रुपए से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो चालू कीमतों में जीडीपी की ग्रोथ 2.6 प्रतिशत थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर जारी बयान में कहा गया कि 2026-27 की पहली तिमाही की जीडीपी का अनुमान 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई सीरीज के आधार पर लगाया गया है। इस कारण, इसकी तुलना 2025-26 की पहली तिमाही के 86 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से नहीं की जा सकती, क्योंकि वह आंकड़ा पुरानी सीरीज का हिस्सा था जिसमें 2011-12 आधार वर्ष था। सही तुलना केवल 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई सीरीज के डेटा के आधार पर निकाले गए 80 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े से ही की जा सकती है।

मंत्रालय ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी अनुमानों की तुलना से पहले जीडीपी सीरीज में किए गए बदलावों को समझना जरूरी है। पहली तिमाही 2025-26 के अनुमान में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा साल की ग्रोथ को ज्यादा दिखाने के लिए इसे घटाया गया है। यह जीडीपी सीरीज में लगातार किए गए तरीके और डेटा से जुड़े बदलावों को दिखाता है।

तिमाही जीडीपी के अनुमान 'बेंचमार्क-इंडिकेटर' तरीके से तैयार किए जाते हैं। इस तरीके में तिमाही अनुमानों में बदलाव संबंधित 'हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स' में होने वाले संशोधनों के आधार पर तय होता है।

बयान में कहा गया है कि तिमाही सीरीज में सौ से ज्यादा वॉल्यूम या वैल्यू इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि फसल उत्पादन में बढ़ोतरी, सीमेंट उत्पादन इंडेक्स में बढ़ोतरी, तैयार स्टील की खपत में बढ़ोतरी और कमर्शियल गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी आदि।

पिछले साल के बेंचमार्क में बदलाव से, अपने आप चालू वर्ष की वास्तविक आर्थिक गतिविधि या अनुमान लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संकेतकों में कोई बनावटी बढ़ोतरी नहीं होती है।


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