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रुपए में स्थिरता लाने के बाद एफआईआई निवेश में हुई बढ़ोतरी: एसबीआई रिसर्च

नई दिल्ली, सरकार द्वारा पिछले महीने और ज्यादा विदेशी फंड आकर्षित करने और रुपए में उतार-चढ़ाव को स्थिर करने के उपाय घोषित किए जाने के बाद भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 7 अरब डॉलर निवेश किए हैं।

रुपए में स्थिरता लाने के बाद एफआईआई निवेश में हुई बढ़ोतरी: एसबीआई रिसर्च
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नई दिल्ली, सरकार द्वारा पिछले महीने और ज्यादा विदेशी फंड आकर्षित करने और रुपए में उतार-चढ़ाव को स्थिर करने के उपाय घोषित किए जाने के बाद भारत में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 7 अरब डॉलर निवेश किए हैं। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में दी गई।

इस दौरान 20 मई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.8 के निचले स्तर से भारतीय रुपए जून के आखिर तक करीब 2.2 प्रतिशत की मजबूती आई है।

पिछले महीने, मध्य पूर्व में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने विदेशी निवेश और रुपए की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय किए। इन उपायों में सॉवरेन बॉन्ड पर एफआईआई और एफपीआई को टैक्स से छूट, एफसीएनआर(बी) डिपॉजिट के लिए सब्सिडी वाली हेजिंग लागत और पीएसयू लोन के लिए रियायती डॉलर-स्वैप सुविधा शामिल है।

हालांकि, हालिया भू-राजनीतिक तनाव ने एक्सचेंज रेट पर फिर से दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अमेरिका-ईरान सीजफायर खत्म करने की घोषणा के बाद ये तनाव और बढ़ गए, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत में उछाल आया और रुपए की कीमत में गिरावट हुई।

इसके बावजूद, आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अब इंडियन बास्केट के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे कम रहने की उम्मीद है। इससे तेल आयात बिल में कम से कम 30 से 35 अरब की बचत होगी, जबकि पहले के अनुमान में तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी।

इस बीच, दो हफ्तों के दौरान रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.4 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जबकि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में कमर्शियल पेपर (सीपी) जारी करने और बैंक क्रेडिट में बढ़ोतरी देखी गई। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सीपी जारी करने में तेजी आई और जून में जारी किए गए सीपी 55 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। वहीं, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक क्रेडिट बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.4 लाख करोड़ रुपए था।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, जिन सेक्टर में सबसे अधिक कमर्शियल पेपर जारी किए गए, उनमें बैंक क्रेडिट ग्रोथ भी मजबूत रही और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में नए प्रोजेक्ट की घोषणाओं में उनकी हिस्सेदारी लगभग 69 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बैंक सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (सीडी) के जरिए फंड जुटा रहे थे। हालांकि, अब इस ट्रेंड के बदलने की उम्मीद है। इसके अलावा, 30 जून को खत्म हुए दो हफ्तों के दौरान रिकॉर्ड 7 लाख करोड़ रुपए की डिपॉजिट बढ़ोतरी के कारण लिक्विडिटी की स्थिति और बेहतर होने की संभावना है।


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