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पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल में फिर उबाल

नई दिल्ली, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है।

पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल में फिर उबाल
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नई दिल्ली, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो लगभग पांच महीने का उच्च स्तर माना जा रहा है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे जोखिमों ने निवेशकों और तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालिया बयानों ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ाया है।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने कहा है कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने मित्र देशों के लिए इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर सकता है, लेकिन मौजूदा हालात के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है और कीमतों को ऊपर ले जा सकती है।

तेल बाजार को समर्थन देने वाला एक अन्य प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हूती विद्रोहियों द्वारा यमन के एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया गया है। इसके अलावा, सऊदी अरब की ऊर्जा, हवाई अड्डा और सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।

इन घटनाओं ने यह आशंका बढ़ा दी है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ेगा।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वर्ष 2026 के दौरान अब तक लगभग 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के लगातार बने रहने से ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है।

ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण निवेशक तेल बाजार में संभावित आपूर्ति जोखिमों को कीमतों में शामिल कर रहे हैं, जिससे तेजी का माहौल बना हुआ है।

हालांकि दूसरी ओर कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तर के लगभग 80 प्रतिशत तक वापस आ चुकी है। हालांकि रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है।

वहीं इराक के तेल मंत्री ने बताया कि इस महीने देश का तेल निर्यात 34 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि निर्यात अब युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच रहा है। इराक ने क्षेत्रीय मानकों की तुलना में आकर्षक छूट देकर अपने निर्यात को बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे ईंधन लागत, परिवहन खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल में और तेजी देखने को मिल सकती है।


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