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क्या यूपीआई के चलते सरकार से नाराज हो सकता है व्यापारी वर्ग

यूपीआई पर नया चार्ज लगने के एलान के बाद कई व्यापारियों ने चिंता जताई है कि इससे कैश के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है.

क्या यूपीआई के चलते सरकार से नाराज हो सकता है व्यापारी वर्ग
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यूपीआई लेनदेन पर नया चार्ज लगने के एलान से व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. कई व्यापारियों का कहना है कि इससे उनकी कमाई कम होगी और कैश के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है.

भारत में अगर आप किसी दुकान पर जाते हैं तो बहुत संभावना है कि वहां काउंटर पर आपको एक क्यूआर कोड रखा मिलेगा. कई बार ये एक से अधिक भी होते हैं. सामान खरीदने के बाद इस क्यूआर कोड को स्कैन कीजिए और यूपीआई से पेमेंट कर दीजिए. इसमें ना खुले रुपयों की दिक्कत होती है और ना ही फटे नोट को लेकर दुकानदार से बहस करनी पड़ती है.

भारत में यूपीआई का जितना इस्तेमाल होता है, उसे देखकर लगता नहीं कि ये पेमेंट सिस्टम सिर्फ 10 साल पुराना है. यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को साल 2016 में आम लोगों के लिए शुरू किया गया था. धीरे-धीरे इसमें नई-नई सुविधाएं जोड़ी जाती रहीं और यह भारत की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंच गया. आज यूपीआई भूटान, नेपाल, सिंगापुर, फ्रांस और कतर समेत 11 देशों में मौजूद है.

यूपीआई के जरिए हर दिन औसतन 66 करोड़ ट्रांजैक्शन होते हैं और करीब 0.86 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन होता है. आज भारत के डिजिटल पेमेंट्स में यूपीआई की हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा है. वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के जरिए 24,000 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनकी कीमत करीब 314 लाख करोड़ रुपये थी.

एमडीआर ने बढ़ा दी व्यापारियों की चिंता

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से 15 सितंबर को एलान किया गया कि 2,000 रुपये से ऊपर के पर्सन-टू-मर्चेंट लेन-देनों पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगेगा. उदाहरण के लिए 5,000 रुपये का लेनदेन करने पर 20 रुपये लगेंगे. यह नियम 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा और इसके तहत प्रति लेन देन अधिकतम 300 रुपये वसूले जा सकेंगे. ये रुपये ग्राहक को नहीं बल्कि मर्चेंट को देने होंगे.

देश के कई व्यापार संगठनों ने एमडीआर लगाने के फैसले पर चिंता जताई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सूरत के कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि इस चार्ज की वजह से यूपीआई पर निर्भर रहने वाले छोटे व्यापारियों और श्रमिकों पर असर पड़ सकता है. ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी मांग की है कि पेट्रोल पंपों को एमडीआर से पूरी तरह छूट दी जाए.

नोएडा के सेक्टर-18 स्थित मार्केट में हैंडलूम की दुकान चलाने वाले ललित ने डीडब्ल्यू हिंदी से कहा कि सरकार जो कैशलेस कम्युनिटी बनाने की तरफ चली थी, यह उसके लिए झटका है. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शॉपिंग की वजह से पहले ही बाजार में इतनी प्रतिस्पर्धा है और ऊपर से दुकानदार के मार्जिन में सेंध लगाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आशंका जताई कि इससे दुकानदार नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगेगा.

क्या यूपीआई की वजह से सरकार ने नाराज होंगे व्यापारी

नोएडा सेक्टर-18 में फर्नीचर की दुकान चलाने वाले संजय कुमार सिंघल एमडीआर लगाने के फैसले को सही बताते हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी से कहा, "जो मैं सोचता हूं, कोई भी चीज फ्री नहीं होती है, चाहे कुछ भी हो तो टैक्स तो लगना ही था. एक समय तक, जितनी देर तक सरकार एडजस्ट कर सकती थी, कर लिया, अब टैक्स तो लगना ही है.”

कपड़ों की दुकान चलाने वाले विजय कुमार की राय इससे अलग है. वे मानते हैं कि इस फैसले से व्यापारी वर्ग में सरकार के प्रति थोड़ी-बहुत नाराजगी हो सकती है. उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी को अपनी राय बताते हुए कहा, "इससे दोनों पर फर्क पड़ेगा. उधर भी और इधर भी. दुकानदार पर भी फर्क पड़ेगा, सरकार के प्रति भी पड़ेगा.”

हैंडलूम की दुकान चलाने वाले ललित का मानना है कि व्यापारी वर्ग में इस फैसले के खिलाफ रोष है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, "अगर आपकी जेब में से मैं कुछ निकालूंगा, तो आपको बुरा लगेगा या नहीं लगेगा? तो वैसे ही हमारे साथ हो रहा है. अब सरकार अगर हमारे प्रॉफिट में से 0.4 प्रतिशत लेगी, तो हमको तो चुभेगा ना वो!”

2,000 रुपये तक की छूट का कितना फायदा

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह एमडीआर केवल लगभग चार फीसदी मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा. इसके दो कारण बताए गए हैं. पहला- 2000 रुपये तक के मर्चेंट लेनदेनों पर एमडीआर नहीं लगेगा. दूसरा- स्ट्रीट वेंडर जैसे छोटे व्यापारी जिन्हें हर महीने यूपीआई के जरिए एक लाख रुपये तक मिलते हैं, उन पर भी कोई एमडीआर नहीं लगेगा.

नोएडा में फुटपॉथ पर कपड़े बेचने वाले प्रदीप कुमार कहते हैं कि 2000 रुपये तक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर छूट मिलने की वजह से छोटे व्यापारियों को फायदा होगा. उन्होंने कहा, "हमारा ट्रांजैक्शन 2000 से ऊपर नहीं होता, ना के बराबर होता है. जो बड़े व्यवसायी हैं, उनको फर्क पड़ सकता है. वो भी थोड़ा, ज्यादा नहीं.”

कपड़ों की बड़ी दुकान चलाने वाले विजय कुमार भी मानते हैं कि इस छूट से छोटे दुकानदारों को फायदा होगा लेकिन वे कहते हैं कि बड़े दुकानदार इसके दायरे में नहीं आएंगे. उन्होंने कहा, "जो बड़े दुकानदार हैं, उनके तो ज्यादा के ही होते हैं. 2000 से तो ऊपर का ही बिल बनता है. किसी का 2500 बनेगा, किसी का 2200 बनेगा, 3000 बनेगा. हमारा तो जाएगा ही जाएगा.”

क्या ग्राहकों पर भी पड़ेगा इसका असर

केंद्र सरकार का कहना है कि एमडीआर केवल व्यापारियों से वसूला जाएगा, आम लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की प्रेस रिलीज के मुताबिक, बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर चार्ज ग्राहकों पर न डालें. इसके अलावा, यूपीआई ऐप्स से भी कहा गया है कि वे कोई प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज न लगाएं.

सरकार द्वारा भरोसा दिए जाने के बावजूद कई लोगों को आशंका है कि आगे चलकर एमडीआर का बोझ ग्राहकों के सिर पर ही आ जाएगा. संजय कुमार सिंघल जो एमडीआर लगाने के फैसले को सही बताते हैं, वे भी मानते हैं कि आखिरकार ये चार्ज ग्राहकों से ही वसूला जाएगा. वहीं, विजय कुमार कहते हैं कि अभी यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इसका बोझ ग्राहकों पर आएगा.

नोएडा के सेक्टर 30 में स्थित ब्रह्मपुत्र मार्केट में खरीदारी करने आए रवि खन्ना को यह भी डर है कि इस चार्ज के चलते ग्राहकों को मिलने वाला डिस्काउंट कम हो जाएगा. उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "आप एक दुकानदार से खरीदने जाते हैं तो उसको जो चार्ज लग रहा है, वो उसे कहीं ना कहीं कस्टमर की ही जेब से ही निकालने की कोशिश करेगा. मान लीजिए आज वो किसी भी चीज पर पांच फीसदी छूट देता है तो वो अब उसे तीन फीसदी कर देगा कि मेरे को यहां पर चार्ज देना पड़ रहा है.”


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