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बर्नस्टीन : निफ्टी का टारगेट घटाकर 25,000 हुआ

मुंबई, ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने निफ्टी के लिए इस साल के अंत तक का टारगेट प्राइस घटाकर 25,000 कर दिया है, जो कि पहले 26,000 था। इसकी वजह अमेरिका से ट्रेड डील पर अनिश्चितता और भारतीय इक्विटी की आय में सुधार को लेकर चिंताएं बने रहना है।

बर्नस्टीन : निफ्टी का टारगेट घटाकर 25,000 हुआ
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मुंबई, ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने निफ्टी के लिए इस साल के अंत तक का टारगेट प्राइस घटाकर 25,000 कर दिया है, जो कि पहले 26,000 था। इसकी वजह अमेरिका से ट्रेड डील पर अनिश्चितता और भारतीय इक्विटी की आय में सुधार को लेकर चिंताएं बने रहना है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि बाजार में कुछ सुधार की उम्मीद है, लेकिन बिगड़ते व्यापाक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कॉरपोरेट आय पर लगातार दबाव के बीच, इसमें लंबे समय तक बढ़त की गुंजाइश सीमित दिखती है।

बर्नस्टीन ने लगातार दूसरी बार निफ्टी के टारगेट प्राइस में कटौती की है। इससे पहले ब्रोकेरज फर्म ने इस साल की शुरुआत में निफ्टी के लिए 28,100 का लक्ष्य निर्धारित किया था। ब्रोकरेज फर्म को अपने पिछले साल के अंत के टारगेट से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद थी।

हालांकि, लगातार खराब होते वैश्विक आर्थिक हालातों, ऊर्जा की महंगी कीमतों और कमजोर आय के आउटलुक के चलते ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए अपना टारगेट प्राइस घटाया है।

बर्नस्टीन ने अपनी भारत स्ट्रेटजी रिपोर्ट में कहा है कि सकारात्मक रिटर्न की उनकी उम्मीदें बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी पर आधारित हैं, न कि भारतीय इक्विटी के दृष्टिकोण में किसी व्यापक सुधार पर।

भारतीय बाजार में गिरावट पर बर्नस्टीन ने कहा कि निफ्टी का आगामी 12 महीनों का 'प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो' (पीई रेशियो) गिरकर 16.6 पर आ गया है, जो पिछले छह वर्षों में इसका सबसे निचला स्तर है। जून 2022 के बाद पहली बार इस इंडेक्स का वैल्यूएशन 17 गुना से नीचे आ गया है। यह स्तर लगभग वैसा ही है, जैसा कोविड-19 के दौरान बाजार में आई गिरावट और 2022 में हुई गिरावट के समय देखा गया था।

बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, "पिछले दो वर्षों में कमाई में मामूली वृद्धि के बावजूद, निफ्टी का मूल्यांकन (वैल्यूएशन) छह साल के निचले स्तर पर होना एक आकर्षक विकल्प लग सकता है।" साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंडेक्स के अपने इतिहास से इसकी तुलना करना भ्रामक हो सकता है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद भी, कई एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर अभी भी महंगे हैं। उन्होंने ऊंचे मूल्यांकन के कारणों के रूप में व्यापक बाजार की कमजोरी और घरेलू फंड के मजबूत प्रवाह का जिक्र किया है।


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