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बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों के 447 हाट और 278 बाजार विकसित करने की तैयारी में जुटी सरकार

बिहार सरकार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य में कृषि, पशुधन, मत्स्य और दूसरे उत्पादों की बिक्री के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के हाटों और बाजारों को विकसित करने जा रही है

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों के 447 हाट और 278 बाजार विकसित करने की तैयारी में जुटी सरकार
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पटना। बिहार सरकार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत राज्य में कृषि, पशुधन, मत्स्य और दूसरे उत्पादों की बिक्री के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के हाटों और बाजारों को विकसित करने जा रही है। इसके तहत 725 हाट और बाजार विकसित किए जाएंगे। इसमें अलग-अलग श्रेणी के 447 हाट और 278 बाजार होंगे।

ग्रामीण स्तर पर हाट और बाजार विकसित करने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग को दी गई है। बिहार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, "सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए हाट बाजारों को विकसित करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। इसका छोटे किसानों और व्यापारियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा।"

विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार के अनुसार विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हाट-बाजार विकसित करने की योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। प्रथम चरण के लिए निर्धारित श्रेणियों में 20-49 डिसमिल के 136 हाट और 73 बाजार, द्वितीय श्रेणी में 50-99 डिसमिल के 125 हाट और 96 बाजार और तृतीय श्रेणी के एक एकड़ या इससे अधिक क्षेत्रफल वाले 186 हाट और 109 बाजार विकसित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सभी हाट और बाजारों में शेड के साथ चबूतरा, शौचालय, पेयजल की सुविधा सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके तहत कार्यालय और मल्टीपर्पस स्टोर की भी व्यवस्था की जाएगी। इनमें जीविका दीदियों के लिए स्थायी दुकान होगी।

उन्होंने बताया कि सभी विकसित हाट बाजारों को ई-नाम योजना से जोड़ने का काम कृषि विपणन निदेशालय, कृषि विभाग करेगा। हाट और बाजार को विकसित किए जाने के बाद स्वामित्व वाले विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी को सौंपा जाएगा। इसके लिए जिला पदाधिकारी के द्वारा एक समिति गठित की जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों की सतत निगरानी की जाएगी। महिलाओं के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादकों को भी इसका लाभ मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


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