जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने जमुई की घटना को एक अलग-थलग मामला बताया
बिहार के जमुई जिले में दो नाबालिग छात्रों (जिनमें एक लड़की भी शामिल है) के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है

पटना। बिहार के जमुई जिले में दो नाबालिग छात्रों (जिनमें एक लड़की भी शामिल है) के साथ कथित उत्पीड़न की घटना ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है, जबकि सत्ताधारी जदयू ने प्रशासन की कार्रवाई का बचाव किया है।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इस घटना को एक अलग-थलग मामला बताया और कहा कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।
कुशवाहा ने कहा कि जब ऐसी अलग-थलग घटनाएं होती हैं, तो हम उन्हें लेकर संवेदनशील होते हैं। लेकिन 2005 से पहले के समय को देखिए, तब बिहार कैसा था? क्या कोई अपने घरों से बाहर भी निकलता था? आज, कम से कम जब कोई घटना होती है, तो प्रशासन कार्रवाई करता है। जिन लोगों ने अपराध किया है, चाहे वे कितने भी बड़े क्यों न हों, वे जल्द ही पुलिस की हिरासत में होंगे।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भी बिहार पुलिस का बचाव किया। उन्होंने अतीत की तुलना करते हुए कहा कि आज बिहार में कानून-व्यवस्था सुरक्षित है। सिंह ने कहा कि उस समय महिलाएं सूरज ढलने के बाद घर से बाहर निकलने से डरती थीं, जबकि आज वे आधी रात, 1 बजे, 2 बजे और सुबह 4 बजे भी बाहर निकलती हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला किया। राजद के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि कानून के शासन को कमजोर किया जा रहा है और उन्होंने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा करने की सरकार की क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि बिहार पुलिस और बिहार सरकार कहां हैं? साथ ही दावा किया कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।
बिहार पुलिस के एडीजी (कानून-व्यवस्था) केएस अनुपम ने बताया कि अब तक तीन नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से दो की उम्र 17 से 18 साल के बीच बताई जा रही है। अनुपम ने कहा कि जमुई पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 128, 74 और 75 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है, साथ ही बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं 8 और 12 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जिसकी निगरानी जमुई के एलडीपीओ कर रहे हैं। पुलिस ने लगभग सात से आठ युवकों की पहचान की है जिनकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है, साथ ही उनके आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन किया जा रहा है।
पुलिस की साइबर टीम ने सोशल मीडिया पर वीडियो को और फैलने से रोकने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। एडीजी अनुपम के अनुसार, पुलिस ने 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाने की कार्रवाई शुरू की है, जिनमें 13 फेसबुक अकाउंट, 12 इस्टाग्राम अकाउंट और एक्स पर सात अकाउंट शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नाबालिग पीड़ित की पहचान या चेहरा उजागर करने वाली सामग्री फैलाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है और लोगों से अपील की कि वे वीडियो को शेयर या रीपोस्ट न करें।
अनुपम के अनुसार, यह घटना 19 सितंबर को शाम 6:25 बजे से 6:30 बजे के बीच जमुई-लखीसराय मुख्य सड़क से लगभग तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में हुई। पुलिस यह पता लगाने के लिए उस जगह और उसके आसपास गश्त की व्यवस्था की भी समीक्षा करेगी कि क्या पुलिसिंग में कोई चूक हुई थी।


