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बिहार कृषि विश्वविद्यालय में ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन, फसलों से जुड़ी समस्याएं एवं प्रबंधन पर चर्चा

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग की देखरेख में फसलों में सूत्रकृमियों (नेमाटोड) से जुड़ी समस्याएं एवं उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन किया गया।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन, फसलों से जुड़ी समस्याएं एवं प्रबंधन पर चर्चा
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पटना। बिहार कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार को अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग की देखरेख में फसलों में सूत्रकृमियों (नेमाटोड) से जुड़ी समस्याएं एवं उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय ब्रेनस्टॉर्मिंग सेशन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर से आई डॉ. निशि केशरी ने अपना व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने कृषि में सूत्रकृमियों की महत्वता एवं खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों द्वारा होने वाले नुकसान तथा उनके नवोन्मुखी समेकित प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यक्रम के दौरान बिहार कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार, बिहार कृषि महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रूबी रानी, सह निदेशक शोध डॉ. चंदा कुशवाहा, कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरण कुमारी, पौधा रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. जे. एन. श्रीवास्तव, विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों एवं परास्नातक विद्यार्थियों सहित 80 से अधिक लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज की।

निदेशक शोध डॉ. ए. के. सिंह ने मौसम परिवर्तन के कारण बदलती परिस्थिति में सूत्रकृमियों की व्यापक समस्याओं के बारे में आगाह किया। इसके साथ ही छात्रों को पौध संरक्षण के क्षेत्र में नवीन कृषि स्वरोजगार से जुड़ने की सलाह दी तथा कहा कि इस तरह के आयोजन से सूत्रकृमियों के बारे में जागरूकता बढ़ेगी एवं इस दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को नया बल मिलेगा।

इस अवसर पर निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार ने भी कृषि में नेमाटोड्स से जुड़ी विश्वव्यापी समस्याओं के बारे में चेताया एवं इनके निदान के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। प्राचार्या डॉ. रूबी रानी ने उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों के बढ़ते प्रकोप के बारे में चिंता व्यक्त की एवं उनके निदान के लिए वैज्ञानिकों से आह्वान किया।

कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. किरण कुमारी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए सूत्रकृमियों के महत्व एवं फसलों, इनके कारण हो रहे नुकसान के बारे में प्रकाश डाला तथा इस क्षेत्र में विभाग द्वारा संचालित परियोजनाओं एवं प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। आयोजन सचिव डॉ. अनुकरण साहू ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए सूत्रकृमियों के महत्व और कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार शर्मा द्वारा किया गया। डॉ. रामानुज विश्वकर्मा ने सभी गणमान्य अतिथियों सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों सहित सभी लोगों का उनकी सहभागिता एवं सक्रिय सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।


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