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मां तुझे सलाम, यही है असली वंदेमातरम

वंदे मातरम का असली मतलब अगर भाजपा के लोग समझते तो कभी उसे अपनी संकीर्ण मानसिकता के साथ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करते

मां तुझे सलाम, यही है असली वंदेमातरम
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  • सर्वमित्रा सुरजन

अपने बेटे को जेल में देखकर भी मां कहे कि हमें आज भगत सिंह की जरूरत है, तो ऐसी मां को हज़ार सलाम, जो बिना घबराए अपने बेटे को न केवल हौसला दे रही हैं, बल्कि बाकी युवाओं को भी ऐसे अन्याय के खिलाफ खड़े होने का आह्वान कर रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल उत्तराखंड के कोटद्वार से आई, जहां जिम प्रशिक्षक दीपक की मां ने उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की परवरिश दी।

वंदे मातरम का असली मतलब अगर भाजपा के लोग समझते तो कभी उसे अपनी संकीर्ण मानसिकता के साथ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन भाजपा के लिए वंदे मातरम का उद्घोष भी वैसा ही है, जैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी मां के संघर्ष को बयां करें। देश से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पर नरेन्द्र मोदी ने न केवल अपनी गरीबी का रोना रोया, बल्कि अपनी मां के संघर्षों का जिक्र कर आंसू बहाए, ताकि सहानुभूति मिल सके। इसके बाद जन्मदिन पर कैमरे के कई एंगल्स के बीच उनके हाथ से प्रसाद खाना या उनके पैरों पर बैठना जैसे उपक्रम भी उन्होंने किए ताकि मां-बेटे के प्यार का राजनीतिक इस्तेमाल हो सके। हालांकि जब तक नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहे, उनकी मां का ऐसा सार्वजनिक जिक्र हुआ हो, याद नहीं पड़ता। क्या प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें अपनी मां के करीब होने की जरूरत ज्यादा पड़ी, यह सोचने वाली बात है। नोटबंदी के फैसले को सही ठहराने के लिए प्रधानमंत्री ने अपनी मां को बैंक की कतार में भी खड़ा कर दिया था और जब उनके जीवन के आखिरी दिनों में जब वे आईसीयू में थीं, तब भी कई कैमरों के साथ नरेन्द्र मोदी आईसीयू में पहुंचे थे, यह भी सबने देखा है। उनकी मौत के बाद भी मां की ममता को राजनैतिक फायदे के लिए भुनाने की कोशिशें उन्होंने की, याद कीजिए कि बिहार चुनाव के वक्त वे गयाजी में उनका पिंडदान करने वाले थे, जबकि यह काम पहले उनके भाई वाराणसी में कर चुके थे। दो-दो बार पिंडदान कर मोदी न केवल अपनी दिवंगत मां का अपमान करते, बल्कि हिंदू धर्म का भी अनादर ही होता। लेकिन समरथ को नहीं दोष गुंसाईं को मोदी ने शायद कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया है कि वे कुछ भी करेंगे और सवाल नहीं उठेंगे।

बहरहाल, मां के नाम को भुनाने का ताजा उदाहरण नरेन्द्र मोदी ने मेरठ में रेपिड मेट्रो के उद्घाटन पर दिया, जहां भाषण देने के दौरान उन्होंने कांग्रेस पर निकृष्ट से निकृष्टतम शब्दों का इस्तेमाल कर हमला किया, इसके साथ ही कहा कि कांग्रेस के लोग उनकी मां को अपशब्द कहते हैं। जबकि बिहार चुनाव के दौरान हुए इस प्रकरण में कांग्रेस का हाथ है, ऐसा कहीं साबित नहीं हुआ है। लेकिन इस समय नरेन्द्र मोदी एपस्टीन फाइल्स, अमेरिका से ट्रेड डील, ऑपरेशन सिंदूर पर उठे सवाल, मनरेगा को खत्म करना, हरदीप पुरी को संरक्षण जैसे कई मुद्दों पर इतनी बुरी तरह घिरे हुए हैं कि उनकी बौखलाहट अब खुलकर जाहिर होने लगी है। मोदी को यह समझ नहीं आ रहा कि सार्वजनिक तौर पर रोने-धोने की चालाकी से अब सियासी फायदा नहीं मिलेगा, क्योंकि लोग भी देश की हकीकत देख रहे हैं। और जिन्हें अब तक हकीकत नजर नहीं आई, उन्हें भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतार कर प्रदर्शन कर दिखा दिया कि मोदी इज़ कॉम्प्रोमाइज़्ड।

इस प्रदर्शन की भाजपा समेत मीडिया के बड़े हिस्से ने खूब आलोचना की, लेकिन इसका कितना व्यापक असर हुआ है, ये मोदी सरकार की घबराहट ने जाहिर कर दिया। उसने पहले कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, लेकिन गिरफ्तार लोगों ने न डर दिखाया, न आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया और न कॉम्प्रोमाइज़्ड (दबाव में आकर समझौता) हुए। इसके बाद कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसकी सार्वजनिक आलोचना की। कांग्रेस नेताओं को धिक्कारते हुए प्रधानमंत्री ने ये तक कह दिया कि इन्हें शर्म नहीं आती। लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस के तेवर ढीले नहीं हुए, बल्कि राहुल गांधी ने तो बाकायदा वीडियो जारी कर बता दिया कि असली शर्म क्या होती है और ये किसे आनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा 'मोदी जी, आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात मैं आपको बताता हूं। एपस्टीन फाइल में आपका, आपके मंत्री और आपके मित्र का नाम साथ में आना, ऐसे घिनौने अपराधी के साथ आपका नाम जुड़ा होना - ये शर्म की बात है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देश को बेच देना शर्म की बात है। राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश का डेटा दे दिया, किसानों को खत्म कर दिया और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया।' राहुल ने अडानी पर अमेरिका में चल रहे केस का ज़िक्र किया और कहा, 'पूरा देश जानता है कि अडानी केस ने आपकी रातों की नींद उड़ा रखी है। यह भाजपा और आपके फाइनेंशियल आर्किटेक्चर पर केस है। 14 महीनों से कोई कार्रवाई नहीं हुई- ये शर्म की बात है।' राहुल ने कहा, 'मोदी जी, आप अपने मित्रों अनिल अंबानी, अडानी और खुद के लिए जो उचित समझें, वो कीजिए। मैं और कांग्रेस पार्टी के बब्बर शेर देश की रक्षा करते रहेंगे- एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।'

राहुल गांधी ने न केवल नरेन्द्र मोदी को चेतावनी दे दी, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को भी संदेश दे दिया कि वो हर हाल में उनके साथ खड़े हैं। युवा कांग्रेस में इस नए जोश का दिखना जाहिर करता है कि जिस कांग्रेस मुक्त भारत का सपना लेकर मोदी सत्ता में आए थे, वो अब दूर की कौड़ी नहीं बल्कि असंभव ही है।

राहुल गांधी का अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होना जाहिर बात है, लेकिन बड़ी बात ये है कि अब कार्यकर्ताओं के अभिभावक भी उनके साथ खड़े हो रहे हैं। जैसे युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को एआई समिट में प्रदर्शन का मास्टरमाइंड बताते हुए पुलिस ने गिरफ्तार किया और अब उन्हें चार दिनों की रिमांड पर भी भेजा जा चुका है। लेकिन इस मुश्किल वक्त में घबराने की जगह उनके माता-पिता अपने बेटे पर गर्व कर रहे हैं कि वो सही काम के लिए हिम्मत दिखा कर डटे रहे। उदय भानु चिब की मां ने कहा कि हमें आज भगत सिंह की जरूरत है। मैं सभी नौजवानों से आह्वान करती हूं कि भगत सिंह बनो और अपने देश की सोचो। उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया है।' वहीं उनके पिता ने कहा कि महात्मा गांधी और उनके साथियों ने आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। यहां दुख इस बात का है कि पीएम मोदी और उनके साथी तो हिंदुस्तानी हैं, कम से कम आप अंग्रजों जैसा हाल मत करो, ये भी हिंदुस्तान हैं, राष्ट्रवादी लोग हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने बेटे पर गर्व है। मैं नहीं समझता उदय ने कुछ गलत किया है। वो नौजवानों के हित में है।'

अपने बेटे को जेल में देखकर भी मां कहे कि हमें आज भगत सिंह की जरूरत है, तो ऐसी मां को हज़ार सलाम, जो बिना घबराए अपने बेटे को न केवल हौसला दे रही हैं, बल्कि बाकी युवाओं को भी ऐसे अन्याय के खिलाफ खड़े होने का आह्वान कर रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल उत्तराखंड के कोटद्वार से आई, जहां जिम प्रशिक्षक दीपक की मां ने उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की परवरिश दी। गौरतलब है कि कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार को बजरंग दल के गुंडे प्रताड़ित कर रहे थे, क्योंकि उनकी दुकान के नाम में बाबा लिखा था। ज्ञान और संस्कृति से कोसों दूर रहने वाले इन गुंडों के हिसाब से बाबा नाम पर हिंदू धर्म का कॉपीराइट है। जब वे बूढ़े मुस्लिम दुकानदार को तंग कर रहे थे तो उनके बचाव में दीपक खड़े हो गए और जब उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया था। यह प्रकरण 26 जनवरी का है। इस दिन नरेन्द्र मोदी संविधान पर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे और उनके राज में पनपते गुंडे संविधान का मखौल उड़ा रहे थे। कायदे से नरेन्द्र मोदी को दीपक से मिल कर उसे बधाई देनी चाहिए थी, लेकिन क्या पता उन्हें राहुल गांधी के साथ-साथ दीपक जैसे लोगों से भी डर लगता हो। बहरहाल, बीते दिनों दिल्ली में राहुल गांधी ने दीपक से अपने घर पर मुलाकात की और पूछा कि उन्हें डर नहीं लगता। तो दीपक ने कहा कि कुछ गलत नहीं किया तो डरूं क्यों। दीपक ने ये भी बताया कि उनकी मां ने उन्हें कहा कि तुमने सही किया और इसमें डरने की कोई बात नहीं है।

घर में अपने बच्चों को बस यही सीख देने की तो जरूरत है कि सच के लिए डटे रहें और अन्याय के सामने झुके नहीं। सत्यकाम जाबाल को यही सीख उनकी मां जबाला ने दी, जीजाबाई ने शिवाजी को दी और विद्यावती कौर ने भगत सिंह को दी। अच्छा है कि यह सिलसिला अब तक बरकरार है।


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