ट्रंप का बयान: ईरान के एमओयू से हटने पर बोले- ‘मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस फ़ैसले को नज़रअंदाज़ कर दिया जिसमें उसने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते से हटने की बात कही थी;
तनाव बढ़ा अमेरिका-ईरान में: परमाणु हथियार रोकने पर अड़ा ट्रंप प्रशासन
- लगातार आठवीं रात हमला: अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को बनाया निशाना
- ईरान का पलटवार: सरकारी मीडिया ने MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का दावा किया
- खामेनेई का हमला: बोले- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं’
वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस फ़ैसले को नज़रअंदाज़ कर दिया जिसमें उसने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते से हटने की बात कही थी।
श्री ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दे रहा है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न आएं।
न्यूज़नेशन के साथ टेलीफ़ोन दिये साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, "मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।" श्री ट्रम्प से ईरान की उस घोषणा के बारे में पूछा गया था जिसमें कहा गया था कि वह अब अमेरिका के साथ पिछले महीने हुए समझौते का पालन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस टकराव का मुख्य मकसद वही है। उन्होंने कहा, "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करने देना है।" श्री ट्रंप की यह प्रतिक्रिया अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेज़ी से बढ़ने के दौरान आई है। दोनों देश एक-दूसरे पर जून में हुए उस समझौते की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, जिसका मकसद महीनों से चल रही दुश्मनी को रोकना था। ईरान का यह फ़ैसला अमेरिकी सैन्य हमलों के एक नए दौर के बाद आया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने राष्ट्रपति ट्रंप की मंज़ूरी से शनिवार देर रात एक और दौर के हमले किए। सेंटकॉम ने एक्स पर कहा कि रात 11:30 बजे (ईटी) चलाए गये इस अभियान का आदेश कमांडर-इन-चीफ़ ने दिया था। इसका मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कम करना है। सेना के अनुसार, यह अभियान ईरानी संपत्तियों को निशाना बनाकर की गई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की लगातार आठवीं रात थी।
इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया ने खबर दी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में अहवाज़ के ऊपर अमेरिका के एमक्यू -9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एमक्यू-9 रीपर एक रिमोट से उड़ाया जाने वाला एयरक्राफ्ट है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने और सटीक हवाई हमले करने के लिए किया जाता है। ईरान के नेताओं ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए अमेरिका पर कुछ हफ़्ते पहले बनी सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने एक्स पर कहा कि अमेरिका की बार-बार की हरकतों ने इस समझौते को बेमतलब साबित कर दिया है। उन्होंने कहा, "ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच हुए एमओयू को लेकर 'ग्रेट शैतान' (अमेरिका) द्वारा समझौते का बार-बार उल्लंघन किए जाने से एक बुनियादी सच्चाई फिर से सामने आ गई है।" श्री खामेनेई ने कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की कोई कीमत नहीं है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।" उन्होंने तर्क दिया कि हालिया सैन्य अभियान ने एक बार फिर सभी को अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की बेमतलबियत दिखा दी है।
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अब खुद को 14-सूत्रीय मेमोरेंडम से बंधा हुआ नहीं मानता क्योंकि अमेरिका अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, श्री बघाई ने कहा, "पाकिस्तान का एमओयू ' वादे के बदले वादा के सिद्धांत पर आधारित था, और अमेरिका द्वारा अपने वादों को तोड़ने के बाद ईरान अब इसे लागू करने के लिए खुद को बाध्य नहीं मानता है।" उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाई केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक ही सीमित थी। उन्होंने कहा, "हमने केवल अपना बचाव किया है और अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सैन्य उपकरणों के अलावा किसी अन्य लक्ष्य पर हमला नहीं किया है।" श्री बघाई ने अमेरिका और इज़रायल पर आम नागरिकों वाले इलाकों में हमले करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "अमेरिका और इजरायली शासन ने अपने हमलों में मुख्य रूप से नागरिक केंद्रों और आम लोगों को निशाना बनाया है, जो युद्ध अपराध का एक स्पष्ट उदाहरण है।" महीनों के संघर्ष के बाद जून के मध्य में हुए इस अंतरिम समझौते का मकसद अमेरिका और और के बीच तनाव कम करना था। इसके टूटने से इस बात का डर पैदा हो गया है कि क्या कूटनीति बनी रह पाएगी, जबकि पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज़ हो रही हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिका पर पिछले महीने हस्ताक्षरित पाकिस्तान के एमओयू बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इन उल्लंघनों ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की "बेकार और अमान्य" प्रकृति को साबित कर दिया है। ईरान का कहना है कि सात अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एकतरफा युद्धविराम की घोषणा के बाद से अमेरिका ने उसके क्षेत्र पर बार-बार हमले किए हैं। ईरान के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले मेमोरेंडम के लागू होने के बाद भी ये उल्लंघन जारी रहे, जबकि इसके पहले प्रावधान में ही शत्रुता को पूरी तरह रोकने की बात कही गई थी। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले तय समुद्री रास्ते के बजाय दूसरे रास्ते से जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, और इसके लिए उन्हें सुरक्षा भी दे रहा है, जिसे ईरान एक अनधिकृत रास्ता मानता है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ ने अधिक राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मनों से बढ़ते दबाव का सामना करने के लिए श्री खामेनेई द्वारा "पवित्र एकता" के आह्वान का पालन करना ज़रूरी है।
श्री क़ालीबाफ़ ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रीय एकता सिर्फ़ एक नैतिक या सामाजिक मूल्य नहीं है, बल्कि ईरान की सुरक्षा और मज़बूती के लिए एक रणनीतिक ज़रूरत है। उन्होंने लिखा, "पवित्र एकता पर ज़ोर देना सिर्फ़ एक नैतिक या सामाजिक सलाह नहीं है। यह दुश्मन के ख़िलाफ़ लड़ाई में जीत के लिए एक ज़रूरी शर्त है।" उन्होंने ईरान के लोगों से सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन को धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य मानने का आग्रह किया और कहा कि यह मौजूदा प्रतिरोध के दौर में देश के ऐतिहासिक मिशन का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा, "हमें नेता के इस धार्मिक और राष्ट्रीय निर्देश का पालन करने को इस राष्ट्रीय प्रतिरोध और देश के संचालन में अपनी ऐतिहासिक भूमिका का एक अहम हिस्सा मानना चाहिए।" उनकी यह टिप्पणी श्री अयातुल्ला ख़ामेनेई के उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि समाज और सरकार के बीच "पवित्र एकता" बनाए रखना ईरान की आज़ादी की रक्षा और इस्लामी क्रांति के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ज़रूरी है, खासकर उस "अपराधी और धोखेबाज़ अमेरिकी दुश्मन" के सामने जिसका उन्होंने ज़िक्र किया था।