रूस : सैन्य-औद्योगिक ढांचे को ईयू ने बनाया निशाना
नई दिल्ली, यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने बताया कि ईयू ने रूसी आक्रामकता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।;
नई दिल्ली, यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने बताया कि ईयू ने रूसी आक्रामकता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
उन्होंने बताया कि ईयू के विदेश मंत्रियों ने रूस के खिलाफ लगभग 1,600 नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है। अब तक लगाए प्रतिबंधों में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
कल्लास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, ''यूरोपीय संघ (ईयू) के विदेश मंत्रियों ने रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को निशाना बनाते हुए लगभग 1,600 नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है। रूस की ओर से युद्ध शुरू किए जाने के बाद से यह प्रतिबंध सूची का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है। यूरोप ने एक बार फिर दिखाया है कि वह इस मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ा है।''
उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, ''इन नए प्रतिबंधों में शामिल आधे से अधिक लोग, कंपनियां और संस्थाएं बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और उनकी सप्लाई चेन से जुड़ी हुई हैं। इन कदमों का उद्देश्य रूस के लिए उन हथियारों का निर्माण करना अधिक कठिन, धीमा और महंगा बनाना है, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जा रहा है।''
ईयू की तरफ से रूस के खिलाफ की गई यह कार्रवाई अमेरिका के साथ हुए उसके डीजल समझौते के बाद की गई है। ईयू का मानना है कि अमेरिका की इस ढील के बाद रूस का व्यापार बढ़ेगा और इस कमाई का उपयोग वह यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में करेगा।
दरअसल, ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति समझौता करने के बाद दुनिया में तेल की समस्या के लिए जेलेंस्की को जिम्मेदार ठहराया।
सीबीएस न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की आलोचना की और रूस की डीजल रिफाइनरियों को निशाना बनाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, "जेलेंस्की जो चाहे कर सकते हैं लेकिन वह यह नहीं कर सकते क्योंकि यह पूरी दुनिया की समस्या है।" ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि अब यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि दुनिया इस समय डीजल ईंधन की रिफाइनिंग क्षमता की कमी जैसी चुनौती का सामना कर रही है और यह समस्या डीजल ईंधन के लिए पर्याप्त रिफाइनरियों की कमी की वजह से पैदा हुई है।