विनिर्माण मूल्य श्रृंखला : वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में कर रहा कार्य

मिल्वॉकी, जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी घरेलू मांग पर आधारित अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है,;

By :  IANS
Update: 2026-10-02 11:19 GMT

मिल्वॉकी, जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी घरेलू मांग पर आधारित अर्थव्यवस्था 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करती है, और डिजाइन से लेकर तैयार माल तक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता उसकी घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता नहीं है।

गोयल ने कहा कि भारत कई सदस्य देशों की इस चिंता से सहमत है कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को विकृत करने वाला समर्थन डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी चिंताओं का समाधान डब्ल्यूटीओ के अनुरूप उपायों के माध्यम से किया जाता है, जिनमें साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के अधीन एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी शामिल हैं।

गोयल के मुताबिक, औद्योगिक क्षमता अपने आप में मुद्दा नहीं है, जबकि विकृतियां तब उत्पन्न हो सकती हैं जब उत्पादन का भौगोलिक संकेंद्रण छिपी हुई सब्सिडी और समर्थन से प्रेरित हो। उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसका उपयोग डब्ल्यूटीओ नियमों से बाहर के उपायों के बहाने के रूप में या समायोजन का बोझ विकासशील देशों पर डालने के लिए नहीं किया जा सकता है, जिन्हें औद्योगीकरण के लिए नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांख्यिकी और डेटा का आदान-प्रदान मौजूदा तंत्रों के भीतर होना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम को समाप्त करने के विषय पर गोयल ने कहा कि जबरन श्रम के उन्मूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पूर्ण और बिना शर्त है। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 23 जबरन श्रम को एक मौलिक अधिकार के रूप में प्रतिबंधित करता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय संगठन के सम्मेलन 29 और 105 की पुष्टि की है और जुलाई 2026 में जबरन श्रम का उपयोग करके उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन किया है।

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