ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रंप की धमकी, तेहरान का पलटवार
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े आर्थिक अभियान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो भी देश ईरान को वित्तीय मदद या कारोबारी सहारा देगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे;
यूरोप में अमेरिकी ठिकाने बने संभावित निशाना
- ईरानी राष्ट्रपति बोले: बातचीत आत्मसमर्पण नहीं
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े आर्थिक अभियान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो भी देश ईरान को वित्तीय मदद या कारोबारी सहारा देगा, उसे गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया और कहा कि यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से अब दुनिया की होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम हो गई है।
ईरान का जवाब
ईरान ने ट्रंप की धमकी को खारिज कर दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिकी दबाव से ईरान झुकेगा नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप अपने देश की आर्थिक समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी चेतावनी दी कि अगर सैन्य टकराव हुआ तो ईरान पहले से अधिक ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल करेगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने यूरोप में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी संभावित निशाना बनाया है। बुल्गारिया और साइप्रस के ठिकाने इसमें शामिल बताए जा रहे हैं।
ईरानी राष्ट्रपति का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका से बातचीत आत्मसमर्पण नहीं है। उनका कहना है कि ईरान का मकसद आर्थिक नाकेबंदी हटवाना और विदेशों में फंसी संपत्तियों को वापस पाना है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की बढ़ती लागत को देखते हुए अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी घटाने पर विचार कर रहा है। अनुमान है कि सितंबर तक अमेरिका को इस संघर्ष से करीब 37.5 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।