भारत-कनाडा के बीच व्यापार की अपार संभावनाएं
नई दिल्ली, भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में बताया कि इस महीने भारत और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है और मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी। कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां पहले से ही भारत में सक्रिय हैं और भारत ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है। दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं।;
नई दिल्ली, भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में बताया कि इस महीने भारत और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है और मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी। कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां पहले से ही भारत में सक्रिय हैं और भारत ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है। दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कहा कि भारत और कनाडा के बीच अभी उतना व्यापार नहीं है, जितनी क्षमता दोनों देशों में मौजूद है। निवेश का स्तर ठीक-ठाक है, लेकिन कृषि, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे कई क्षेत्रों में व्यापार अभी भी सीमित है। तेल का उदाहरण लें। कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन भारत को उसका पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ डॉलर थी। जबकि भारत हर साल लगभग 150 अरब डॉलर का तेल आयात करता है। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की कितनी बड़ी संभावना मौजूद है। यह केवल एक उदाहरण है। कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम अभी उस आर्थिक साझेदारी की शुरुआती अवस्था में हैं, जो भविष्य में कहीं ज्यादा बड़ी हो सकती है।
कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां बेंगलुरु के आसपास पहले से ही हैं। दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता भी मौजूद है। दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता भी मौजूद है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम ने नए अवसर पैदा किए हैं। भारत ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है। स्काईरूट जैसी कंपनियां इसका उदाहरण हैं, जिनका मैंने कुछ हफ्ते पहले दौरा भी किया था। कनाडा में भी इसी तरह का स्टार्टअप माहौल तेजी से विकसित हो रहा है। इस महीने दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है और मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी।
क्रिस्टोफर कहा, इसी तरह भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं। कनाडा अपने खनन क्षेत्र को तेजी से विकसित कर रहा है और इसके लिए रेलवे सहित बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए जा रहे हैं। अभी भारत इन खनिजों में से कई की बहुत कम मात्रा कनाडा से आयात करता है। पोटाश का कुछ व्यापार होता है, जबकि तांबा और निकेल का व्यापार बेहद सीमित है। दूसरी ओर, कनाडा के पास लिथियम और ग्रेफाइट जैसे संसाधन हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए बेहद जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं। उदाहरण के लिए टंगस्टन, जिसका इस्तेमाल रक्षा और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है। कनाडा के पास टंगस्टन के बड़े भंडार हैं और हम भारत के खान मंत्रालय तथा निजी कंपनियों के साथ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आपूर्ति, प्रोसेसिंग और बाजार विकास में कैसे सहयोग किया जा सकता है।
क्रिस्टोफर ने बताया कि इसके अलावा ऊर्जा एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। इसके अलावा वह तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भी बड़ा उत्पादक है। कनाडा के पास यूरेनियम के भी पर्याप्त भंडार हैं। मार्च में कनाडा ने भारत के साथ लगभग 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया था। भारत के 24 परमाणु रिएक्टरों में से 18 कनाडाई डिजाइन पर आधारित हैं, जो भविष्य में और सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने बतायाक कि हम कनाडा के पश्चिमी तट पर ऐसे बुनियादी ढांचे का भी विकास कर रहे हैं, जिससे भारत को ऊर्जा निर्यात करना और आसान हो जाएगा। अगले तीन महीने, छह महीने, एक साल और उसके बाद भी ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ने की उम्मीद है। भारत के पास कनाडा से ऊर्जा हासिल करने के ऐसे नए विकल्प होंगे, जो पहले उपलब्ध नहीं थे।