युद्ध के समय चुनाव कराने से यूक्रेन बर्बाद हो सकता है: जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने युद्ध के समय चुनाव कराने से इनकार करते हुए चेतावनी दी है कि इस संकटकाल में मतदान कराना देश के लिए एक 'सुनामी' साबित हो सकता है और यूक्रेन बिखर और बर्बाद हो सकता है;
मार्शल लॉ में मतदान स्थगित, दबाव का जिक्र
- सैनिकों और प्रवासी यूक्रेनियों की सुरक्षा जरूरी
- जेलेंस्की की रणनीति: युद्ध खत्म कर संप्रभुता बचाना
कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने युद्ध के समय चुनाव कराने से इनकार करते हुए चेतावनी दी है कि इस संकटकाल में मतदान कराना देश के लिए एक 'सुनामी' साबित हो सकता है और यूक्रेन बिखर और बर्बाद हो सकता है।
गौरतलब है कि यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने 18 अगस्त को एक वीडियो संदेश में युद्ध के बीच चुनाव कराने की मांग की थी। उनका तर्क था कि यूक्रेन को नये सिरे से लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की जरूरत है।
श्री जेलेंस्की ने संवाददाताओं से कहा कि युद्ध के समय चुनाव यूक्रेन के लिए 'सुनामी' साबित हो सकते हैं और राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर सकते हैं।उन्होंने कहा, "अगर हम देश को बर्बाद करना चाहते हैं, तो इस तरह के युद्ध के दौरान हम चुनाव की ओर बढ़ सकते हैं।"
श्री फेडोरोव को जुलाई में रक्षा मंत्री के पद से हटा दिया गया था। यूक्रेन के संविधान के अनुसार मार्शल लॉ के तहत चुनाव स्थगित कर दिए जाते हैं। फरवरी 2022 में रूस द्वारा बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने के बाद से ही मार्शल लॉ लागू है।
श्री जेलेंस्की ने युद्ध के दौरान चुनाव कराने के लिए अलग-अलग पक्षों से यूक्रेन पर पहले डाले गए दबाव का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी सहयोगी देश ने ऐसी ठोस शर्तें नहीं रखीं जिनके तहत 'सुरक्षित, वैध और लोकतांत्रिक' तरीके से मतदान कराई जा सके।
उन्होंने कहा कि किसी भी चुनाव में सेना के जवानों, युद्ध के इलाकों में रहने वाले लोगों और विदेशों में रह रहे लाखों देशवासियों को भाग लेने का मौका मिलना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मतदाता रूसी हमलों से सुरक्षित रहें।
श्री जेलेंस्की ने कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी चुनाव में यह सुनिश्चित करना होगा कि सैनिक, युद्ध इलाकों के पास रहने वाले लोग और विदेशों में रह रहे लाखों यूक्रेनी सुरक्षित और निष्पक्ष रूप से मत डाल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को रूसी हमलों से सुरक्षा की जरूरत होगी।
श्री जेलेंस्की के अनुसार यूक्रेन के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों ने युद्ध जारी रहने के दौरान इस तरह का चुनाव कराने के लिए कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया है।
'कीव इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, "मेरी रणनीति देश को युद्ध के अंत तक ले जाना और एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य को बचाए रखना है।" श्री जेलेंस्की की ये बातें इस बढ़ती बहस को उजागर करती हैं कि रूस से लड़ते हुए यूक्रेन कैसे और कब सामान्य लोकतांत्रिक राजनीति में लौट सकता है। फिलहाल उनका तर्क है कि चुनाव कराने से अधिक जरूरी युद्ध को खत्म करना और यूक्रेन की संप्रभुता को बचाए रखना है।