पेरिस: फ्रांस में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हिंसा की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। देशभर में शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शनों के मद्देनजर करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। हाल के दिनों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत हेलीकॉप्टरों से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा बख्तरबंद वाहनों और वाटर कैनन की भी तैनाती की गई है। फ्रांस सरकार ने प्रदर्शनकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि हिंसा फैलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। देश में बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों और सरकारी खर्च में कटौती को लेकर लोगों में नाराजगी है। छात्र संगठनों, श्रमिक संघों और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रदर्शनों में शामिल होने की संभावना है।
ट्रेप्स के पास गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत
फ्रांस में तनाव के बीच शुक्रवार को पेरिस के पश्चिम में स्थित ट्रेप्स के पास गोलीबारी की घटना सामने आई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 12 साल की बच्ची समेत चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने घटना के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच आतंकवाद रोधी अभियोजन कार्यालय को सौंप दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोलीबारी के पीछे आतंकवादी गतिविधि, नस्ली नफरत या धार्मिक कारण तो नहीं थे। ट्रेप्स के मेयर अली राबेह के मुताबिक, आरोपी ने अपनी कार से गोलीबारी की थी। राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने घटना पर दुख जताया है। हालांकि, गोलीबारी और देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
महंगाई और सरकारी कटौती के खिलाफ सड़कों पर लोग
फ्रांस में सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक मुद्दे बताए जा रहे हैं। सितंबर के आखिर में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन शुरू हुए थे। बाद में इन प्रदर्शनों ने व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया। बढ़ती महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतें और सार्वजनिक क्षेत्र के बजट में कटौती को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सरकारी नीतियों का असर आम नागरिकों और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ रहा है। इसी वजह से छात्र संगठनों और श्रमिक समूहों ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की तैयारी की है। सीजीटी श्रम संघ और येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी से प्रदर्शनों का दायरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देते हुए हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं पर नियंत्रण रखे।
सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
राष्ट्रपति मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नु के साथ बैठक के बाद आंतरिक मंत्री लारेंट नुनेज ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ कट्टर वामपंथी समूहों की ओर से हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के लिए उकसाने वाले संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। मंत्री के मुताबिक, अधिकारियों ने सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाने की अपील से जुड़ी सैकड़ों ऑनलाइन कॉल की पहचान की है। पुलिस को हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दंगाइयों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर पेरिस के लूवरे समेत कई संग्रहालयों को बंद रखने और कुछ प्रस्तावित कार्यक्रमों तथा समारोहों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है। सिटी हॉल, सार्वजनिक इमारतों और अन्य संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस इकाइयां भी तैनात की जाएंगी।
भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय की सलाह
फ्रांस में संभावित हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भारतीय नागरिकों से भीड़भाड़ वाले इलाकों और प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने तथा बाहर निकलने से पहले स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेने को कहा गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, फ्रांस, इटली और बेल्जियम में भारतीय दूतावासों को सतर्क कर दिया गया है। ये दूतावास घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और संबंधित देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं। भारतीय नागरिकों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी गई है। फिलहाल फ्रांस में सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा की आशंका को कम करने के लिए तैयारियों में जुटी हैं।