कतर में इराकी पीएम से मिले अमीर, अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने पर जोर

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की;

Update: 2026-07-20 00:49 GMT

दोहा। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने रविवार को इराक के प्रधानमंत्री अली फलीह अल-जैदी से मुलाकात की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने की अपील की।

अमीर के प्रशासनिक कार्यालय, 'अमीरी दीवान' की ओर से जारी बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने सभी पक्षों से बातचीत का रास्ता अपनाने और एमओयू के तहत हुई सहमतियों को लागू करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की आजादी बनी रहनी चाहिए और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों की समीक्षा की और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, अमेरिका और ईरान ने जून के मध्य में यह एमओयू साइन किया था। इसके तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके अंतिम समझौते तक पहुंचने की कोशिश करनी थी। हालांकि, हाल के दिनों में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। दोनों देशों के बीच मध्य पूर्व में कई दौर के हमले हुए हैं।

ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है, इसलिए ईरान ने भी शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना फिलहाल रोक दिया है।

सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक इंटरव्यू में गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने एमओयू के तहत अपनी लगभग सभी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है या उन्हें निलंबित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान का पूरा ध्यान अपनी सुरक्षा पर है और फिलहाल किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है।

उन्होंने कहा, "इस समय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरे मजबूती के साथ अपने देश की रक्षा करना है। इस बार भी अमेरिका को जवाब मिल चुका है कि इस तरह की आक्रामक कार्रवाई से उसे कोई फायदा नहीं होगा। अगर वे समझदारी से काम लें, तो उन्हें दूसरा रास्ता चुनना चाहिए।"

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरान के साथ हाल ही में हुए शांति समझौता ज्ञापन (एमओयू) का अमेरिका की ओर से उल्लंघन किए जाने से एक बार फिर यह साबित हो गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर की कोई विश्वसनीयता नहीं है।

ईरानी मीडिया के अनुसार, उन्होंने देश के नाम अपने संदेश में कई अहम मुद्दों पर बात करते हुए यह टिप्पणी की।

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