चिली में 6.7 तीव्रता का भूकंप, जनजीवन सुरक्षित
चिली के उत्तरी हिस्से में मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम करीब 5:52 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3:22 बजे) 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया;
एंटोफागास्टा क्षेत्र के पास आया झटका, सतह पर मध्यम कंपन
- रिंग ऑफ फायर में फिर हलचल, सुनामी का खतरा नहीं
- खनन क्षेत्रों में काम रोका गया, स्कूलों की कक्षाएं स्थगित
- भूकंप-प्रतिरोधी इमारतों ने बचाई जानें, विशेषज्ञों ने दी राहत की वजह
नई दिल्ली। चिली के उत्तरी हिस्से में मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम करीब 5:52 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3:22 बजे) 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी जान-माल की हानि नहीं हुई।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) और चिली के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर के अनुसार, भूकंप का केंद्र अक्षांश 22.472 डिग्री दक्षिण और देशांतर 68.590 डिग्री पश्चिम में स्थित था। भूकंप की गहराई 85 किलोमीटर बताई गई है। यह भूकंप इक्वीके शहर से लगभग 296 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व (एसएसई) दिशा में आया।
चिली प्रशांत महासागर की ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार गतिविधि के कारण भूकंप आना आम बात है। यह क्षेत्र खनन गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है। भूकंप का केंद्र मुख्य रूप से एंटोफागास्टा क्षेत्र के पास था, जो कैलामा शहर के निकट पड़ता है। भूकंप का केंद्र गहराई में होने के कारण सतह पर कंपन मध्यम स्तर का महसूस किया गया, लेकिन बड़े पैमाने पर नुकसान की कोई खबर नहीं है।
अब तक किसी प्रकार की जान-माल की हानि, भारी क्षति या सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कुछ सड़कों पर छोटे-मोटे भूस्खलन देखे गए, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। कैलामा और आसपास के खनन क्षेत्रों में सुरक्षा जांच के लिए अस्थायी रूप से काम रोक दिया गया। स्कूलों में अगले दिन की कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं, ताकि भवनों की जांच की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि 85 किलोमीटर की गहराई के कारण बड़े नुकसान से बचाव हुआ। यदि यह भूकंप कम गहराई में आता, तो इसके परिणाम अधिक गंभीर हो सकते थे। चिली की भूकंप-प्रतिरोधी इमारतें और आपदा प्रबंधन प्रणाली विश्व स्तर पर मिसाल मानी जाती हैं। 2010 और 2014 के बड़े भूकंपों के बाद चिली ने अपने बिल्डिंग कोड को और मजबूत किया है, जिससे अब मध्यम तीव्रता के भूकंपों में जान-माल का नुकसान अपेक्षाकृत कम रहता है।