विश्व को शांति और एकता की जरूरत : वेंकैया नायडू

परमार्थ निकेतन शिविर में आयोजित ''कीवा फेस्टिवल'' (धरती का हृदय) का अद्भुत महोत्सव मनाया जा रहा है

Update: 2019-02-17 00:12 GMT

प्रयागराज। परमार्थ निकेतन शिविर में आयोजित ''कीवा फेस्टिवल'' (धरती का हृदय) का अद्भुत महोत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में  देश के उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू , उत्तरप्रदेश के राज्यपाल राम नाईक  अन्य विशिष्ट अतिथियों और विश्व के 42 देशों से आये आदिवासी, जनजाति और आदिम जाति के लोगों ने सहभाग किया। सभी विशिष्ट अतिथियों ने श्रद्धांजलि, शान्ति और शक्ति हेतु किये जा रहे हवन में आहुतियाँ प्रदान की। परमार्थ निकेतन में किये जा रहे ''शादी को ना और पढ़ाई को हाँ'' कैम्पेन की दीवार पर  उपराष्ट्रपति  ने हस्ताक्षर कर 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का संदेश दिया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने कहा कि ''विश्व में सात आश्चर्य हैं परन्तु आज मैं कुम्भ मेला के रूप में विश्व का आठँवा आश्चर्य देख रहा हूँ। ''वीवा-कीवा'' कुम्भ के अवसर कीवा फेस्टिवल का आयोजन अद्भुत है। कुम्भ का उद्भव भी नदियों के तटों पर हुआ है और आज संगम के तट पर होने वाला कीवा पर्व हमें नदियों और प्रकृति के संरक्षण का संदेश दे रहा है। आज पूरे विश्व को, आकाश को, पृथ्वी को शान्ति की जरूरत है।

संगम के तट से विविधता में एकता का संदेश देते हुए श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि ''विविध भाषा, विविध वेश फिर भी मेरा देश एक'', विविधता में एकता भारत की विशेषता, ''हम सब एक है''। आप सभी यहां से ''पूरी दुनिया एक है'' की भावना लेकर जायें। यह अवसर प्रकृति से जुड़ना और नदियों से जुड़ने का है यही हमारी पौराणिक  परम्परा भी है। उन्होने सतत, सुरक्षित और शान्तिपूर्ण विकास की बात की और कहा कि योग केवल एक आसनों का अभ्यास ही नहीं है बल्कि वह एक विज्ञान है।

राज्यपाल राम नाईक  ने ''जीवन में चलते रहो-चलते रहो का संदेश देते हुये कहा कि जिस प्रकार हमारी नदियाँ और सूर्य निरन्तर चलते रहते है इस प्रकार कुम्भ से चलते रहने का संदेश लेकर जाये। कुम्भ की सांस्कृतिक धारा भारत ही नहीं बल्कि विश्व में भी चलती रहे। उन्होने कहा कि कुम्भ मेला के अवसर यह कीवा कुम्भ और योगा कुम्भ का अद्भुत संयोग है। 

रूट ऑफ अर्थ के निदेशक हेरिबेरतो जी ने कहा कि विश्व के आदिम जाति और आदिवासी समुदाय के लोगों ने प्रथम बार कुम्भ मेला में सहभाग किया वास्तव में यह अद्भुत अवसर है और हम इसके सहभागी है। कीवा पर्व के माध्यम से हम नदियों के संरक्षण का संदेश पूरे विश्व में प्रसारित करते हैं। 

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा, ''हम आज संगम के तट पर अदृभुत संगम देख रहे है; हम सभी संगम के तट पर एक हो रहे है, संगम में डुबकी लगा रहे हैं। साथ ही यहां से सरलता, सात्विकता और शुद्धता का संदेश लेकर जायेंगे। आज पूरे विश्व को ''समन्वय का संगम और सर्व समावेशी का संगम'' की आवश्यकता है।
 

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