नंदीग्राम उपचुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत, 21 अक्टूबर को करना होगा सरेंडर

मिलान प्रधान की गिरफ्तारी पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े हत्या के आरोपों के सिलसिले में हुई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था।;

Update: 2026-09-29 07:31 GMT

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी मिलान प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने उन्हें 10-10 हजार रुपये के दो बॉन्ड पर अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने राहत के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। यह जमानत फिलहाल 20 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी और उन्हें अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को हल्दिया कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा।

20 अक्टूबर तक मिली राहत

अदालत के आदेश के अनुसार, मिलान प्रधान को अपना मौजूदा मोबाइल नंबर स्थानीय पुलिस थाने में जमा कराना होगा। हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत की अवधि भी स्पष्ट रूप से तय की है। 20 अक्टूबर तक राहत मिलने के बाद उन्हें 21 अक्टूबर को हल्दिया की निचली अदालत के समक्ष पेश होकर सरेंडर करना होगा। इस तरह हाईकोर्ट का आदेश उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत देता है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निचली अदालत में जारी रहेगी।

नामांकन के बाद गिरफ्तारी का अदालत ने लिया संज्ञान

मिलान प्रधान की गिरफ्तारी पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े हत्या के आरोपों के सिलसिले में हुई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस तीर्थंकर घोष की अदालत ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था। अदालत में राज्य सरकार की ओर से पेश सामग्री पर विचार करते हुए यह भी कहा गया कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि वर्ष 2007 के बाद इन मामलों में मिलान प्रधान को पहले कभी गिरफ्तार किया गया था।

2007 से दर्ज हैं छह मामले

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मिलान प्रधान के खिलाफ वर्ष 2007 से अब तक कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें दो मामले कोंटाई अदालत और चार मामले हल्दिया अदालत में विचाराधीन बताए गए हैं। इन्हीं पुराने मामलों से जुड़े आरोपों के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत ने उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद मामले में हाईकोर्ट का रुख किया गया, जहां अंतरिम जमानत की मांग पर सुनवाई हुई।

जमानत के साथ शर्तें भी तय

हाईकोर्ट ने राहत देते हुए मिलान प्रधान के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की हैं। इनमें सबसे प्रमुख शर्त उनका मौजूदा मोबाइल नंबर स्थानीय पुलिस स्टेशन में जमा कराना है। इसके अलावा अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें निर्धारित तारीख पर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत का यह आदेश फिलहाल सीमित अवधि के लिए है। इसलिए आगे की कानूनी कार्रवाई और निचली अदालत में चल रहे मामलों का परिणाम महत्वपूर्ण रहेगा।

पत्नी ने गिरफ्तारी को बताया था गलत

मिलान प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी अर्पिता प्रधान ने इसे गलत और झूठे आरोपों पर आधारित कार्रवाई बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति को ऐसे मामलों में हिरासत में लिया गया जिनमें उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। अर्पिता प्रधान ने यह भी कहा था कि यदि किसी व्यक्ति को झूठे आरोपों में हिरासत में लिया जाता है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, ये उनकी ओर से लगाए गए आरोप हैं और इन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

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