बागी विधायकों को मनाने में जुटीं ममता, आज आवास पर बुलाई विधायकों की अहम बैठक

राजनीतिक संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कई बागी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से फोन पर संपर्क किया और उन्हें वापस पार्टी के साथ आने का आग्रह किया।;

Update: 2026-06-05 06:52 GMT

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में उभरी बगावत ने ऐसा रूप ले लिया है कि अब पार्टी नेतृत्व और संगठन दोनों पर नियंत्रण को लेकर खुली लड़ाई शुरू हो गई है। 58 बागी विधायकों ने विधानसभा में तृणमूल के परिषदीय दल पर अपना दावा जताते हुए निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया है। विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने भी उन्हें आधिकारिक मान्यता दे दी है, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सक्रिय हुईं ममता बनर्जी

राजनीतिक संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कई बागी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से फोन पर संपर्क किया और उन्हें वापस पार्टी के साथ आने का आग्रह किया। हालांकि इन बातचीतों का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि ममता पार्टी में टूट को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि ममता ने शुक्रवार को कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी विधायकों की एक अहम बैठक भी बुलाई है। इस बैठक को शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि अधिक से अधिक विधायक इसमें शामिल होकर संगठन के प्रति अपनी निष्ठा दिखाएं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बागी खेमे के कितने विधायक इस बैठक में शामिल होंगे।

अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल

टीएमसी के भीतर चल रहे विवाद का एक बड़ा कारण पार्टी के भविष्य के नेतृत्व को लेकर असहमति भी माना जा रहा है। बागी विधायकों ने संकेत दिए हैं कि वे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। दूसरी ओर, विपक्ष के नेता बनाए जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों के साथ अलग बैठक कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इससे यह संदेश गया कि बागी गुट फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

ममता के सामने कानूनी लड़ाई का विकल्प

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी के सामने पहला बड़ा विकल्प कानूनी रास्ता अपनाने का है। वह विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मान्यता दिए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती हैं। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इस संभावना के संकेत दिए हैं। हालांकि संसदीय मामलों में अदालतें आमतौर पर सीधे हस्तक्षेप करने से बचती हैं, लेकिन अतीत में कई मामलों में स्पीकर के फैसलों की न्यायिक समीक्षा हुई है। ऐसे में यह मामला अदालत तक पहुंच सकता है और वहां से नए राजनीतिक समीकरण भी बन सकते हैं।

निष्कासन का फैसला पड़ सकता है भारी

ममता बनर्जी के सामने दूसरा विकल्प बागी विधायकों को पार्टी से निष्कासित करने का है। लेकिन यह कदम राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि 58 विधायकों को बाहर किया जाता है तो विधानसभा में टीएमसी की संख्या काफी घट जाएगी और पार्टी प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा भी खो सकती है। इसके बाद बागी विधायक चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की मांग कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद खड़ा हो सकता है।

चुनाव आयोग के सामने पहुंचेगा असली टीएमसी का सवाल

यदि मामला चुनाव आयोग तक पहुंचता है तो केवल विधायकों की संख्या के आधार पर फैसला नहीं होगा। आयोग सांसदों, संगठन के पदाधिकारियों और पार्टी के विभिन्न स्तरों पर समर्थन की स्थिति का भी आकलन करेगा। सभी पक्षों के दावे और साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह तय किया जाएगा कि वास्तविक तृणमूल कांग्रेस किसे माना जाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन पर ममता बनर्जी की पकड़ अभी भी मजबूत है, इसलिए चुनाव चिह्न और पार्टी की पहचान बचाने की संभावना उनके खेमे के पास बनी रह सकती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बगावत केवल विधायकों तक सीमित रहती है या फिर सांसदों और संगठन के अन्य नेताओं तक भी फैलती है।

स्पीकर ने ऋतब्रत की बर्खास्तगी पर उठाए सवाल

विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने ऋतब्रत बनर्जी की बर्खास्तगी को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उनका कहना है कि पार्टी संविधान के अनुसार किसी सदस्य को निष्कासित करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना और जवाब देने का अवसर देना आवश्यक होता है। ऋतब्रत के मामले में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, इसलिए उनकी बर्खास्तगी वैध नहीं मानी जा सकती। बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल सबकी नजर ममता बनर्जी की बैठक, बागी विधायकों के अगले कदम और संभावित कानूनी लड़ाई पर टिकी हुई है।

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