वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर ममता ने केंद्र पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए शनिवार को केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने और शांतिपूर्ण असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया।;

Update: 2026-07-18 16:25 GMT

ममता की चिंता: वांगचुक के स्वास्थ्य पर जताई फिक्र

  • केंद्र पर हमला: बातचीत से इनकार पर साधा निशाना
  • फोन पर बातचीत: वांगचुक से सीधे हालचाल लिया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए शनिवार को केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने और शांतिपूर्ण असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करने का आग्रह किया।

सुश्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वे श्री वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर 'बेहद चिंतित' हैं। इसके साथ ही उन्होंने बातचीत की उनकी बार-बार की जा रही अपीलों को नजरअंदाज करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

उन्होंने लिखा, "श्री वांगचुक के स्वास्थ्य और भलाई को लेकर बेहद चिंतित हूं। उन्होंने केवल बातचीत की मांग की थी, फिर भी हफ्तों से उनकी अपील पर सन्नाटा पसरा हुआ है। लोकतंत्र में, शांतिपूर्ण असहमति पर बातचीत होनी चाहिए, खामोशी नहीं पसरनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "श्री वांगचुक की आवाज वैसे ही नजरअंदाज की गयी है, जैसे अनगिनत युवा भारतीयों की आवाजों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।" उन्होंने तुरंत चिकित्सीय मदद की मांग करते हुए अधिकारियों से आग्रह किया कि यदि आवश्यक हो तो श्री वांगचुक को एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

सुश्री बनर्जी ने कहा, "उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दी जानी चाहिए और अगर आवश्यकता हो तो नागरिक इसका खर्च उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। जनता का विश्वास पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान से अर्जित किया जाता है, न कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाकर या बातचीत से इनकार कर।"

केंद्र पर अपना हमला तेज करते हुए उन्होंने लिखा, "एक सरकार जो असहमति को लोकतांत्रिक दायित्व के बजाय खतरे के रूप में देखती है, वह जवाबदेही से बचते हुए जनता के विश्वास की मांग नहीं कर सकती।"

सुश्री बनर्जी की यह ताजा टिप्पणी व्यक्तिगत रूप से फोन पर श्री वांगचुक से बात करने और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जानने के बाद आयी है।

उनके अनुसार, श्री वांगचुक ने कभी भी टकराव का रास्ता नहीं चुना, बल्कि उन्होंने केवल सरकार के साथ बातचीत की मांग की थी।उन्होंने तर्क दिया कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में, सरकारों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को नजरअंदाज करने के बजाय नागरिकों की चिंताओं को सुनना चाहिए और चर्चा के माध्यम से मुद्दों का समाधान करना चाहिए।

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