नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजरती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर असंतोष, बगावत और इस्तीफों की श्रृंखला ने नेतृत्व के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। हाल के घटनाक्रमों में पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों द्वारा अलग गुट बनाने के दावों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। सूत्रों के अनुसार, ये सांसद जल्द ही अपने अलग राजनीतिक रुख की औपचारिक जानकारी लोकसभा स्पीकर को सौंप सकते हैं। हालांकि स्पीकर फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं, जिससे इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
दिल्ली में तेज हुई राजनीतिक गतिविधियां
सोमवार को दिल्ली में टीएमसी से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर दिनभर राजनीतिक हलचल बनी रही। कई सांसदों की बैठकों और मुलाकातों ने अटकलों को और मजबूत कर दिया कि पार्टी के भीतर गहरी दरार उभर रही है। सूत्रों का दावा है कि टीएमसी के कई सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इन बैठकों में पार्टी के अंदरूनी हालात और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा बताया जा रहा है कि कुछ सांसदों ने अन्य राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार करना शुरू कर दिया है।
लोकसभा में 20 सांसदों के अलग होने का दावा
टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं। पार्टी में किसी भी प्रकार के औपचारिक विभाजन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 19 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। बागी गुट की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके साथ 20 सांसद हैं, जिससे वे कानूनी रूप से अलग गुट के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकते हैं। इस समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर भी मतभेद सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ सांसद लोकसभा में नेतृत्व के रूप में अभिषेक बनर्जी के बजाय काकोली घोष दस्तीदार को प्राथमिकता देना चाहते हैं। यह आंतरिक असहमति पार्टी के लिए और जटिल स्थिति पैदा कर रही है।
बागी सांसदों की सूची और बढ़ती बैठकों का दौर
सूत्रों के अनुसार, बागी खेमे में शामिल बताए जा रहे सांसदों में काकली घोष दस्तीदार (बारासात), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शताब्दी रॉय (बीरभूम), असित कुमार मल, बापी हलदर (मथुरापुर), जून मालिया (मेदिनिपुर), जगदीश बसुनिया (कूच बिहार), कालीपद सोरेन (झारग्राम), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), पार्थ भौमिक (बैरकपुर) और शर्मिला सरकार (बर्दवान पूर्व) जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन सांसदों की एक और बैठक शाम 6:30 बजे दिल्ली में शताब्दी रॉय के आवास पर प्रस्तावित बताई गई है। इससे पहले भी कई सांसदों की बैठकें हो चुकी हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि यह मामला अब केवल असंतोष तक सीमित नहीं है बल्कि संगठित राजनीतिक गतिविधि का रूप लेता जा रहा है।
शुभेंदु अधिकारी और भाजपा नेताओं से मुलाकात की चर्चा
सूत्रों का यह भी कहना है कि 14 टीएमसी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। यह बैठक भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बताई जा रही है। बैठक में कुछ अन्य भाजपा नेताओं और पूर्व त्रिपुरा मुख्यमंत्री बिप्लब देब की मौजूदगी की भी चर्चा है।
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम से पहले टीएमसी को बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन INDIA की बैठक में शामिल थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम है।
पार्टी के भीतर असंतोष पर खुलकर बयानबाजी
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के बाद टीएमसी के भीतर मतभेदों को लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है। पार्टी से पहले निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के कई सांसदों में असंतोष है। उन्होंने संसद के कामकाज और वरिष्ठ नेताओं के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए और संकेत दिया कि आने वाले समय में और भी सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं।
राज्यसभा और लोकसभा में टीएमसी की स्थिति
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की कुल 17 सीटें हैं, जिनमें से 13 टीएमसी के पास और 3 भाजपा के पास हैं। हालिया इस्तीफों और राजनीतिक हलचल के बाद राज्यसभा में पार्टी की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं, जो अब संभावित टूट की स्थिति में राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दो-तिहाई सांसद अलग गुट बनाते हैं, तो यह पार्टी के लिए बड़ा संगठनात्मक झटका साबित हो सकता है।
ममता बनर्जी के सामने बढ़ती चुनौतियां
लगातार हो रहे इस्तीफे, बागी गतिविधियां और दिल्ली में बढ़ती राजनीतिक हलचल ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। विपक्ष पहले से ही इस स्थिति को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और इसे पार्टी की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि टीएमसी की ओर से अभी तक इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।