किसानों को हम और समझाने की कोशिश करेंगे : कृषि राज्यमंत्री

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का कहना है कि नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को और समझाने की कोशिश होगी

Update: 2020-12-08 00:21 GMT

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला का कहना है कि नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को और समझाने की कोशिश होगी और केंद्र सरकार द्वारा कृषि व संबद्ध क्षेत्र में शुरू किए गए सुधार के कार्यक्रमों की रफ्तार बनी रहेगी। केंद्र सरकार द्वारा लागू नए कृषि कानून के विरोध में किसान सड़कों पर उतरे हुए हैं और वे 26 नवंबर से देश की राजधानी की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान संगठनों के नेता सरकार से तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। हालांकि केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री रूपाला को उम्मीद है कि बातचीत से ही मसले का हल निकल सकता है और किसान सरकार की बात मान लेंगे।

किसानों के आंदोलन पर उतरने को लेकर आईएएनएस द्वारा पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "हम उनको और समझाने की कोशिश करेंगे।"

नए कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ किसान नेताओं की पांच दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। सरकार ने किसान नेताओं द्वारा सुझाए गए मसलों पर कानून में संशोधन के प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन अब तक वे इसके लिए राजी नहीं हुए हैं।

केंद्रीय मंत्री रूपाला का कहना है कि नए कानून किसानों के हितों का ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और यह बात उन्हें समझाने की कोशिश की जा रही है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शनिवार को पांचवीं दौर की वार्ता के बाद किसान नेताओं को अगले दौर की वार्ता के लिए नौ दिसंबर को फिर आमंत्रित किया है।

हालांकि, किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर व दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है।

मोदी सरकार द्वारा कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सुधार के मकसद से लागू किए गए तीन नए कानूनों में कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 शामिल हैं।

किसान नेता इन कानूनों को वापस लेने के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की खरीद की गारंटी की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उनकी कुछ और मांगे भी हैं।

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