लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के बाद अब यूपी में भी एनालॉग डेयरी उत्पादों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। दूध, घी, खोया, पनीर, क्रीम समेत अन्य दुग्ध उत्पादों के निर्माण में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा का इस्तेमाल पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उत्पादों को जब्त कर नष्ट किया जाएगा। इसके अलावा संबंधित डेयरी का निर्माण कार्य बंद कराने, खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।
15 अगस्त को जारी हुआ संशोधित आदेश
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने 15 अगस्त को संशोधित आदेश जारी कर अधिकारियों को इन निर्देशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने को कहा है। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच के दौरान लिए गए कई नमूनों में अपमिश्रकों की पुष्टि हुई है। इसके बाद विभाग ने ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला लिया है।
जांच में सामने आए कई तरह के रसायन
विभाग के मुताबिक, कुछ दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों में कथित तौर पर रिफाइंड तेल और वसा, सोयाबीन तथा उसके उत्पादों के अलावा टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसी सामग्री के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपाल, टीनोपाल, हाइड्रोजन पैराक्साइड और विभिन्न न्यूट्रलाइजर जैसे रसायनों के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आने का उल्लेख आदेश में किया गया है। सरकार का कहना है कि कम कीमत वाली घटिया सामग्री या संभावित रूप से विषाक्त रसायनों का इस्तेमाल कर तैयार किए गए ऐसे उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
दूध, पनीर और घी समेत सभी उत्पाद कार्रवाई के दायरे में
नए निर्देशों के तहत सिर्फ दूध ही नहीं, बल्कि घी, खोया, पनीर, क्रीम और अन्य दुग्ध उत्पाद भी कार्रवाई के दायरे में होंगे। यदि किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई में विजातीय वसा या प्रतिबंधित अथवा हानिकारक रसायन पाए जाते हैं, तो परिसर में मौजूद संबंधित दुग्ध उत्पादों को जब्त कर नष्ट कराया जाएगा। इसका उद्देश्य मिलावटी या नियमों के विपरीत तैयार किए गए उत्पादों को बाजार में पहुंचने से रोकना है।
निर्माण तुरंत बंद कराने का निर्देश
ऐसे मामलों में संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 34 के तहत आकस्मिक प्रतिबंध आदेश जारी किया जा सकेगा। इसके तहत प्रतिष्ठान का निर्माण कार्य तत्काल बंद कराया जाएगा। साथ ही मामले की गंभीरता के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कराने और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
लाइसेंस निलंबित, ब्रांड की बिक्री पर रोक
सरकार ने मिलावट पाए जाने पर सिर्फ संबंधित यूनिट के खिलाफ कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रखा है। ऐसे प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जाएगा। यदि किसी ब्रांड के उत्पादों में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा की पुष्टि होती है, तो उस ब्रांड की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे संबंधित कंपनियों और डेयरी कारोबारियों के लिए खाद्य गुणवत्ता मानकों का पालन करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
दूसरे राज्यों से आने वाले उत्पाद भी जांच के दायरे में
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बाहर निर्मित दूध और दुग्ध उत्पादों को भी इस कार्रवाई के दायरे में रखा है। यदि किसी बाहरी राज्य में बने उत्पाद में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा की पुष्टि होती है, तो संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में रोक लगाई जा सकती है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप दूध एवं दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराना है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों की जांच और प्रवर्तन कार्रवाई पर नजर रहेगी कि निर्देशों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है।