UP Politics: सोशल मीडिया पर आमने-सामने आए अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक, इंटरव्यू को लेकर छिड़ी सियासी जंग

वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और उपमुख्यमंत्री पर निशाना साधा, जिसके जवाब में ब्रजेश पाठक ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।;

Update: 2026-05-30 05:53 GMT

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस बार विवाद की वजह बना उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा साझा किया गया एक वीडियो, जिसमें वह पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप का साक्षात्कार लेते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और उपमुख्यमंत्री पर निशाना साधा, जिसके जवाब में ब्रजेश पाठक ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

मंत्री नरेंद्र कश्यप के इंटरव्यू का वीडियो 

गुरुवार को उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में वह एक पत्रकार की भूमिका में मंत्री नरेंद्र कश्यप से बातचीत करते दिखाई दिए। चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) अभियान का जिक्र हुआ। बातचीत में नरेंद्र कश्यप ने पीडीए की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए इसे ‘फैमिली डेवलपमेंट अथॉरिटी’ बताया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति परिवार तक सीमित रही है और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उसके दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते। वीडियो में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के शासनकाल के दौरान पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए किए गए कार्यों पर भी चर्चा की गई।

मोदी सरकार की योजनाओं का भी हुआ उल्लेख

वीडियो में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े कदमों का भी उल्लेख किया गया। मंत्री नरेंद्र कश्यप ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। इस दौरान सामाजिक प्रतिनिधित्व, कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी नीतियों को लेकर भाजपा सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखने की कोशिश की गई। यही वीडियो बाद में राजनीतिक बयानबाजी का कारण बन गया।

अखिलेश यादव का तंज

वीडियो वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना नाम लिए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पर निशाना साधते हुए लिखा कि जो व्यक्ति स्वास्थ्य मंत्री के रूप में सफल नहीं हो पाया, वह अब पत्रकार बनने की कोशिश कर रहा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार, संगठन और राजनीतिक जिम्मेदारियों में विफल रहने के कारण कुछ नेता ऐसे कार्यक्रमों में समय व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इस समय बिजली संकट, भीषण गर्मी और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही है, जबकि सरकार के मंत्री गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय ‘इंटरव्यू-इंटरव्यू’ खेलने में व्यस्त हैं। सपा प्रमुख की इस टिप्पणी को भाजपा नेताओं ने राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा और इसका जवाब देने में देर नहीं लगाई।

ब्रजेश पाठक का पलटवार

अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं।” इसके साथ ही उन्होंने कई ऐतिहासिक राजनीतिक हस्तियों की तस्वीर साझा की। पोस्ट में पंडित दीनदयाल उपाध्याय, समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया, तत्कालीन जनसंघ अध्यक्ष पीतांबर दास और भारत रत्न नानाजी देशमुख का उल्लेख किया गया। ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और विचार-विमर्श का विशेष महत्व है और तानाशाही सोच रखने वाले लोग ही संवाद का विरोध करते हैं।

पत्रकारिता को लेकर भी दिया संदेश

ब्रजेश पाठक ने अपनी प्रतिक्रिया में पत्रकारिता पेशे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार होना गर्व की बात है और देश के अनेक बड़े जननेताओं ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को ‘खाली बैठा’ बताना या उनके कार्य को कमतर आंकना उचित नहीं है। उनके अनुसार यह पत्रकारिता जगत और उसमें कार्यरत लोगों का अपमान है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संवाद की संस्कृति को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बयानबाजी ने बढ़ाया सियासी तापमान

ब्रजेश पाठक ने अपनी प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत और राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने सपा प्रमुख को ‘युवराज’ और ‘झूठ का सौदागर’ बताते हुए कहा कि मेहनत और संवाद की राजनीति कुछ लोगों को पसंद नहीं आती।

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को सामने ला दिया है। एक साधारण वीडियो से शुरू हुआ विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कितना आगे बढ़ता है, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन फिलहाल भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सोशल मीडिया पर सियासी जंग तेज होती दिखाई दे रही है।

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