राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे की सीबीआई जांच और सीएजी ऑडिट की मांग, हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल
अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंदे के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर एक नई कानूनी पहल सामने आई है। अधिवक्ता मोहित अशोक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है।;
लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंदे के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर एक नई कानूनी पहल सामने आई है। अधिवक्ता मोहित अशोक ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की व्यापक ऑडिट कराने की मांग की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े चंदे के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अधिवक्ता मोहित अशोक ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि उनकी ओर से दायर जनहित याचिका का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर में प्राप्त चंदे के उपयोग में कथित गड़बड़ियों की सच्चाई सामने लाना है।
उन्होंने कहा कि याचिका में दो प्रमुख मांगें की गई हैं। पहली मांग यह है कि किसी स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी, विशेष रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), से पूरे मामले की गहन जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच के माध्यम से तथ्यों का पता लगाया जाए और यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
याचिका की दूसरी महत्वपूर्ण मांग भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ऑडिट कराना है। अधिवक्ता का कहना है कि मंदिर निर्माण शुरू होने से लेकर वर्तमान समय तक प्राप्त दान राशि और उसके खर्च का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। लाखों भक्त अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा मंदिर निर्माण और धार्मिक कार्यों के लिए दान स्वरूप देते हैं, इसलिए उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके योगदान का उपयोग किस प्रकार किया गया।
मोहित अशोक ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों और विभिन्न खबरों के माध्यम से ऐसी जानकारियां सामने आई हैं, जिनमें कुछ लोगों पर चंदे की राशि के दुरुपयोग और उससे निजी संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर बड़े भूखंड और अन्य संपत्तियां खरीदी हैं।
अधिवक्ता ने कहा कि यदि जांच और ऑडिट के माध्यम से सभी तथ्य सार्वजनिक हो जाते हैं तो इससे लोगों का विश्वास और मजबूत होगा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।