नोएडा मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई, 3 पूर्व लॉ ऑफिसर समेत कई पर 6 FIR दर्ज

बहुचर्चित नोएडा मुआवजा घोटाले में अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मुआवजा घोटाले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नोएडा के थाना फेज-1 में छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराते हुए नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसरों और उनके सहयोगियों को आरोपी बनाया है। यह मामला वर्षों से चर्चा में रहा है और अब जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।;

By :  IANS
Update: 2026-06-13 12:07 GMT

नोएडा। बहुचर्चित नोएडा मुआवजा घोटाले में अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित मुआवजा घोटाले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने नोएडा के थाना फेज-1 में छह अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराते हुए नोएडा प्राधिकरण के तीन पूर्व लॉ ऑफिसरों और उनके सहयोगियों को आरोपी बनाया है। यह मामला वर्षों से चर्चा में रहा है और अब जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में भूमि अधिग्रहण से जुड़े अतिरिक्त मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। शिकायतों के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और बाद में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर विशेष जांच दल का गठन किया गया। SIT ने विस्तृत जांच के दौरान किसानों और लाभार्थियों के बयान दर्ज किए, दस्तावेजों की जांच की तथा वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की।

जांच में सामने आया कि नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन लॉ ऑफिसर राजेश कुमार, दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र कुमार नागर ने कथित तौर पर कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर मुआवजा वितरण प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं। एसआईटी ने समाजवादी पार्टी के नेता विजेंद्र कुमार त्यागी, राजकुमार त्यागी और राजकुमार को भी इस मामले में आरोपी बनाया है।

आरोप है कि अदालत के आदेश पर जारी अतिरिक्त मुआवजे की रकम में से एक संगठित सिंडिकेट ने लाभार्थियों से 10 प्रतिशत तक नकद कमीशन वसूला। इतना ही नहीं, लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये की राशि का गबन किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क ने मुआवजा प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया।

सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जांच को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं, जिसके बाद एसआईटी को विस्तृत जांच के निर्देश मिले थे। अब जांच पूरी होने पर दर्ज एफआईआर के आधार पर आरोपियों से पूछताछ, गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विशेष बात यह है कि इन मामलों की विवेचना सामान्य थाने की पुलिस के बजाय एसआईटी से जुड़े एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिससे जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।


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