राम मंदिर चढ़ावा मामले में पहली SIT की फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी, चंपत राय-अनिल मिश्रा को क्लीन चिट!

सूत्रों के अनुसार, SIT की फाइनल रिपोर्ट में केवल उन आठ लोगों के नाम शामिल हैं, जिन्हें इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया है।;

Update: 2026-08-18 07:51 GMT

अयोध्या: Ram Mandir SIT report: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले में पहली SIT की फाइनल रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को दोषी नहीं पाया गया है। दोनों का नाम आरोपियों की सूची में भी शामिल नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश के गृह विभाग की ओर से यह रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपी गई है। अब इसे ट्रस्ट की 2 सितंबर को प्रस्तावित बैठक में रखा जाएगा। खास बात यह है कि ट्रस्ट ने ही उत्तर प्रदेश सरकार से चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित अनियमितताओं की SIT जांच कराने का अनुरोध किया था।

फाइनल रिपोर्ट में आठ आरोपी

सूत्रों के अनुसार, SIT की फाइनल रिपोर्ट में केवल उन आठ लोगों के नाम शामिल हैं, जिन्हें इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया है। हालांकि, जांच में दान की रकम की गिनती के दौरान बैंक और ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कुछ कमजोरियों और प्रशासनिक चूकों का उल्लेख किया गया है। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट और संबंधित व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाने की बात सामने आई है।

प्रारंभिक रिपोर्ट में भी नहीं था सीधा आरोप

इस मामले की शुरुआती जांच रिपोर्ट में भी चंपत राय को क्लीन चिट दिए जाने की बात सामने आई थी। वहीं, डॉ. अनिल मिश्रा के संबंध में दान की रकम की गिनती और निगरानी में लापरवाही का उल्लेख किया गया था, लेकिन उन्हें सीधे आरोपी नहीं बनाया गया था। अब फाइनल रिपोर्ट में भी दोनों के खिलाफ आपराधिक आरोप कायम नहीं रहने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट की आधिकारिक सार्वजनिक प्रति उपलब्ध होने के बाद ही इसके सभी निष्कर्षों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

13 जून को बनी थी पहली SIT

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पहली SIT का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को किया गया था। तीन सदस्यीय इस टीम की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने की थी। SIT में आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को सदस्य बनाया गया था। टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी थी। प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था और जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे।

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया था इस्तीफा 

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसके अलावा गोपाल नागरकट्टे को स्पेशल इनवाइटी की सूची से हटाने का फैसला भी किया गया था। अब पहली SIT की फाइनल रिपोर्ट में दोनों पूर्व पदाधिकारियों को आरोपी नहीं बनाए जाने की जानकारी सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बनी दूसरी SIT

पहली SIT की जांच के बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी और विशेषज्ञता बढ़ाने से जुड़े निर्देश दिए थे। इसके बाद 20 जुलाई को नई SIT गठित की गई। इसमें लखनऊ रेंज के IG किरण एस, डीआईजी अयोध्या सोमेन वर्मा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया। यह दूसरी SIT भी चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले की जांच कर रही है। इसमें वित्तीय पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

अब 2 सितंबर की बैठक पर नजर

पहली SIT की फाइनल रिपोर्ट अब राम मंदिर ट्रस्ट की 2 सितंबर को होने वाली बैठक में रखी जाएगी। बैठक में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा हो सकती है और मंदिर की दान व्यवस्था को और पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने को लेकर आगे के कदमों पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल सूत्रों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ आरोप साबित नहीं होने की बात कही जा रही है। हालांकि, मामले की दूसरी SIT की जांच अभी जारी है। ऐसे में आगे आने वाली जांच रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही से ही इस पूरे मामले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।

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