मुरादाबाद: एमएलसी चुनाव में अनियमितता का आरोप, एसटी हसन ने गिनाईं गड़बड़ियां
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में अनियमितताओं और फर्जी मतदान को लेकर सवाल उठाए;
मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने मुरादाबाद-बरेली शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में अनियमितताओं और फर्जी मतदान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो संबंधित कॉलेज में शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज में प्रवेश पाल नाम का कोई शिक्षक नहीं है, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज है और उन्होंने मतदान भी किया है। हसन ने कहा कि यदि चुनाव में इस तरह की धांधली होती है तो निष्पक्ष चुनाव कराने का औचित्य ही समाप्त हो जाता है।
डॉ. एसटी हसन ने कहा कि मतदान होना अपने आप में पर्याप्त नहीं है, बल्कि चुनाव की प्रक्रिया निष्पक्ष और ईमानदार भी होनी चाहिए। मतदाता सूची में एक शिक्षक का नाम दो बार दर्ज होने जैसी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। जो घटनाएं लोगों की नजर में आ रही हैं, वे पूरी स्थिति का केवल एक हिस्सा हैं और कई दूसरी गड़बड़ियां ऐसी भी हो सकती हैं, जिन पर लोगों का ध्यान नहीं गया है।
हयात मुस्लिम इंटर कॉलेज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रवेश पाल नाम का कोई शिक्षक वहां नहीं है, लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम क्रमांक 304 पर दर्ज है और उसने मतदान भी किया है। हसन ने कहा कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति को वोट डालने दिया जाता है, जो संबंधित संस्थान में शिक्षक ही नहीं है तो चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि अगर इस तरह से फर्जी मतदान होगा तो फिर चुनाव कराने की जरूरत क्या है। उन्होंने मांग की कि चुनाव ईमानदारी से कराए जाएं अन्यथा मतदान की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बनाकर चलाने का कोई औचित्य नहीं है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस बयान पर भी एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया की तुलना सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया से की गई थी। इस संबंध में विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाए जाने की संभावना पर हसन ने कहा कि विपक्ष को संसद में बहुमत की स्थिति का पता है और प्रस्ताव गिराया जा सकता है। प्रस्ताव लाने का उद्देश्य केवल उसे पारित कराना नहीं, बल्कि अपनी ओर से प्रयास करना भी है। इससे यह स्पष्ट होगा कि कौन निष्पक्षता के पक्ष में खड़ा है और कौन इसका विरोध करता है।
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर हसन ने भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और दूसरी समस्याओं से परेशान है। रोजगार के अवसर कम हुए हैं, मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग परेशान हैं तथा महंगाई चरम पर है। एसटी हसन ने किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गेहूं की बुवाई का समय आने के बावजूद किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर परेशानी हो रही है। उन्होंने खाद की कमी तथा लंबी कतारों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डीजल महंगा होने से भी किसानों पर दबाव बढ़ता है। सपा नेता ने यह भी दावा किया कि जनता भाजपा से नाराज है और आगामी चुनाव में इसका असर दिखाई देगा।
सपा नेता आजम खान की स्थिति के लिए अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराए जाने संबंधी ओम प्रकाश राजभर के बयान पर हसन ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों में आरोप गलत हैं। अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में प्रयास किए हैं और उनके साथ खड़े रहे हैं। खान के खिलाफ मामले किस सरकार के कार्यकाल में दर्ज किए गए और उनके पीछे कौन जिम्मेदार था। अखिलेश यादव आजम खान को समर्थन देने और उन्हें मजबूती प्रदान करने की कोशिश कर रहे हैं।
दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन की फंडिंग को लेकर आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार के आरोपों पर हसन ने कहा कि प्रदर्शन में कोई बहुत बड़ी फंडिंग नहीं हुई थी। लोगों ने अपने स्तर पर खर्च उठाया और शुरुआत में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपने पैसे से भोजन की व्यवस्था की। बाद में हिंदू समुदाय के लोगों ने भी मिलकर भोजन का इंतजाम किया। हसन ने सवाल किया कि क्या आरएसएस की फंडिंग का कभी ऑडिट हुआ है। प्रदर्शन में भोजन की व्यवस्था के लिए अलग-अलग लोगों के सहयोग को संदिग्ध बताना उचित नहीं है।
देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने वाले इंद्रेश कुमार के बयान पर डॉ. एसटी हसन ने कहा कि उनके विचार में विभाजन में मुहम्मद अली जिन्ना और सावरकर की भूमिका महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि गांधी और जवाहरलाल नेहरू देश का विभाजन नहीं चाहते थे और धर्मनिरपेक्ष संविधान और विविधता में एकता बनाए रखने के पक्ष में थे।
डॉ. एसटी हसन ने चीन के साथ सीमा संबंधी मुद्दों को उठाते हुए आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों से चीन भारतीय सीमाओं पर अतिक्रमण कर रहा है और अरुणाचल प्रदेश के कुछ गांवों पर कब्जे का दावा किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह सीमा की स्थिति के बारे में देश को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं देती। उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि देश की सीमाएं सुरक्षित रहें।