बिना ट्रायल सालों तक जेल में रखना न्याय नहीं, जनता आवाज उठाएगी: अबू आजमी
जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सवाल उठाने का अधिकार है। यदि लोगों को वर्षों तक बिना ट्रायल के जेल में रखा जाएगा तो जनता की आवाज उठना स्वाभाविक है।;
आजमगढ़। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को सवाल उठाने का अधिकार है। यदि लोगों को वर्षों तक बिना ट्रायल के जेल में रखा जाएगा तो जनता की आवाज उठना स्वाभाविक है।
जामिया यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे विवादित नारों को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सबको आवाज उठाने का अधिकार दिया है। अगर देश में कोई भी बड़ा से बड़ा अपराधी हो और जेल में बंद हो, तो लोग चाहेंगे कि उस पर जल्दी केस चलाया जाए और दोषी साबित होने पर उसे सजा मिले, लेकिन अगर आप केस ही नहीं चलाएंगे और लोगों को पांच-पांच, छह-छह साल तक बिना ट्रायल के जेल में रखेंगे तो मैं समझता हूं कि जनता आवाज उठाएगी ही।
उन्होंने कहा कि एक पीढ़ी खत्म हो गई, दूसरी पीढ़ी खत्म हो गई और केस चलता रहता है। जमानत तो तुरंत अधिकार है और अधिकतम दो-तीन साल में केस का फैसला हो जाना चाहिए। अगर केस शुरू ही नहीं हो पा रहा है तो लोगों का आवाज उठाना गलत नहीं है।
सपा नेता ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को पूरा अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। विपक्ष के नेता का पद क्यों बनाया जाता है? उसको विशेष दर्जा क्यों दिया जाता है? सरकार ही उसको कैबिनेट का दर्जा देती है, सारी सुविधाएं देती है, ताकि वह सरकार की गतिविधियों पर नजर रखे और सवाल उठाए। तो क्या आप उसे भी कुचल देना चाहते हैं? क्या आप लोगों की आवाज को कुचल सकते हैं?
उन्होंने कहा कि मुझे अच्छी तरह याद है, जब मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं, तो उनके बंगले के सामने से गुजरने वाली गाड़ियां बंद कर दी गई थीं। विधानसभा के सामने जहां लोग आंदोलन करने आते थे, वह भी बंद कर दिया गया था। जब अखिलेश यादव की सरकार आई तो उन्होंने अपने घर के सामने से गुजरने वाली गाड़ियों को फिर चालू कर दिया और विधानसभा के सामने आंदोलन की जगह को भी और बड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन करो।
अबू आजमी ने कहा कि आंदोलन तब होता है जब लोग परेशान होते हैं। समाजवादी पार्टी परेशान लोगों की आवाज उठाना चाहती है। अगर आज भी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े देख लिए जाएं तो मालूम पड़ जाएगा कि अलग-अलग दलों के कितने सांसद और विधायक आपराधिक मामलों में शामिल हैं। जो लोग पोस्टर लगा रहे हैं, उन्हीं के लोगों पर ज्यादा अपराध के आरोप हैं।
उन्होंने कहा कि परिवारवाद की बात करने वाले लोग समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी इस तरह की बातें नहीं करती। सच्चाई यह है कि समाजवादी पार्टी इतनी मजबूत है कि लोग स्वयं चाहते हैं कि अखिलेश यादव के परिवार के सदस्य चुनाव लड़ें, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि वे जीतेंगे। कई बार वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते, लेकिन कार्यकर्ता और जनता दबाव बनाती है। यह भी लोकतंत्र का हिस्सा है।
सपा नेता ने कहा कि एक किसान परिवार का व्यक्ति, जिसने साइकिल पर चलकर राजनीति शुरू की, लोगों से चंदा लेकर राजनीति की, जो किसी बड़े राजनीतिक घराने से नहीं था, जिसने पैदल चलकर संघर्ष किया, यदि उसका परिवार आज देश के बड़े राजनीतिक परिवारों में गिना जाता है तो यह संघर्ष की देन है, पैसे की नहीं।