राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 'चंपत राय और उनके साथी छोड़ दें अयोध्या', फैजाबाद बार एसोसिएशन ने दी आंदोलन की चेतावनी

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने पैरवी से इनकार कर दिया है। एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।;

Update: 2026-06-29 09:13 GMT

अयोध्या : श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पेशी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से की जाएगी। सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। वहीं, दूसरी ओर फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस मामले में किसी भी आरोपी की पैरवी न करने का ऐलान कर दिया है, जिससे कानूनी प्रक्रिया को लेकर विवाद और बढ़ गया है।

फैजाबाद बार एसोसिएशन का सख्त रुख

फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालका प्रसाद मिश्रा ने स्पष्ट कहा है कि जो भी अधिवक्ता इस मामले में आरोपियों की पैरवी करेगा, उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। इसके साथ ही एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या से हटाया जाए। एसोसिएशन के इस फैसले ने न्यायिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि कानूनी विशेषज्ञ इसे वकालत के अधिकार से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।

चंपत राय से घंटों पूछताछ

इससे पहले सोमवार सुबह पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से लंबी पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। पूछताछ बंद कमरे में घंटों चली, जिसमें चढ़ावा गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, दान संग्रह प्रणाली और उससे जुड़े कई तकनीकी पहलुओं पर सवाल किए गए। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों और कर्मचारियों से भी विस्तृत बयान दर्ज किए हैं। जांच का फोकस यह है कि दान राशि के संग्रह से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया में कहां गड़बड़ी हुई।

एसआईटी जांच में बड़े खुलासे

यह मामला 6 जून को तब सामने आया जब राम मंदिर में चढ़ावा राशि में कथित चोरी की शिकायत दर्ज हुई। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर राज्य सरकार ने एसआईटी (Special Investigation Team) का गठन किया। एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट हाल ही में शासन को सौंपी, जिसके बाद कार्रवाई तेज कर दी गई। रिपोर्ट के आधार पर 25 जून की शाम को पुलिस ने कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इनमें गणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी और पर्यवेक्षणीय भूमिका निभाने वाले लोग शामिल हैं।

किन लोगों पर लगे हैं आरोप

जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू का नाम शामिल है। एसआईटी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि चढ़ावा गणना प्रक्रिया के दौरान कुछ कर्मचारियों ने धनराशि में हेरफेर कर चोरी की। साथ ही पर्यवेक्षणीय स्तर पर लापरवाही और संभावित मिलीभगत के संकेत भी मिले हैं।

पुलिस की जांच में क्या सामने आया?

जांच एजेंसी के अनुसार, चढ़ावा राशि की गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं पाई गई हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों ने दान राशि को प्रक्रिया के दौरान ही गबन किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह घटना केवल कुछ कर्मचारियों की हरकत थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी, जांच जारी

एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उनसे पूछताछ जारी है और मामले से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है।

संवेदनशील मामला बना प्रशासन के लिए चुनौती

राम मंदिर से जुड़ा यह मामला धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। एक तरफ जहां ट्रस्ट पारदर्शिता और व्यवस्था की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वकीलों के संगठन का पैरवी से इनकार न्यायिक प्रक्रिया को जटिल बना रहा है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल प्रशासन आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी की तैयारी कर रहा है और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में एसआईटी की आगे की रिपोर्ट और कोर्ट की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी।

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