अखिलेश यादव से CJP प्रवक्ता की डेढ़ घंटे की मुलाकात, यूपी में नए सियासी समीकरणों की चर्चा तेज

अखिलेश यादव और आशुतोष रांका के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि समाजवादी पार्टी ने इसे शिष्टाचार और आभार व्यक्त करने वाली मुलाकात बताया है और किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन की चर्चा से इनकार किया है।;

Update: 2026-09-04 05:22 GMT

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका की मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। लखनऊ में हुई इस बैठक को लेकर छात्र-युवा मुद्दों से लेकर संभावित राजनीतिक तालमेल तक कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। अखिलेश यादव और आशुतोष रांका के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। हालांकि समाजवादी पार्टी ने इसे शिष्टाचार और आभार व्यक्त करने वाली मुलाकात बताया है और किसी राजनीतिक समझौते या गठबंधन की चर्चा से इनकार किया है। इसके बावजूद बैठक की अवधि और मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

सपा मुख्यालय के पास हुई मुलाकात

यह बैठक गुरुवार शाम करीब 4 बजे लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के कार्यालय में हुई। आशुतोष रांका के साथ उनके सात सहयोगी भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। CJP की ओर से इसे हाल के छात्र आंदोलनों में समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करने की पहल बताया गया है। खास तौर पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान सपा सांसदों के समर्थन का उल्लेख किया गया।

सपा ने कहा- राजनीतिक चर्चा नहीं हुई

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि आशुतोष रांका अखिलेश यादव से मुलाकात के लिए मुख्य रूप से धन्यवाद देने आए थे। उनके मुताबिक, जब दिल्ली में युवाओं का आंदोलन चल रहा था, तब समाजवादी पार्टी ने सड़क से लेकर सदन तक युवाओं की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सपा सांसद डिंपल यादव समेत पार्टी के कई नेताओं ने आंदोलन के दौरान युवाओं का समर्थन किया था। इसी सहयोग के लिए CJP नेता ने अखिलेश यादव का आभार जताया। सपा ने स्पष्ट किया कि मुलाकात में किसी राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं हुई।

डिंपल यादव पहले भी आंदोलन में दिखी थीं सक्रिय

CJP के आंदोलनों के दौरान समाजवादी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी पहले भी सामने आई है। 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में मैनपुरी सांसद डिंपल यादव भी शामिल हुई थीं। आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक तौर पर भी ध्यान खींचा था। इसके अलावा राजस्थान में 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान आशुतोष रांका पर कथित हमले के मुद्दे को भी अखिलेश यादव ने सार्वजनिक तौर पर उठाया था। ऐसे में दोनों के बीच मुलाकात को पुराने संवाद की अगली कड़ी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

छात्र और रोजगार के मुद्दे बन सकते हैं साझा आधार

CJP पिछले कुछ समय से नीट और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रही है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी भी बेरोजगारी, पेपर लीक और सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरती रही है। ऐसे में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं और युवाओं के मुद्दे दोनों पक्षों के बीच संवाद का संभावित आधार बन सकते हैं। CJP के 'स्कूल जोड़ो अभियान' और सपा के सामाजिक न्याय से जुड़े राजनीतिक नैरेटिव के बीच भी संभावित समानताओं की चर्चा हो रही है।

Gen-Z वोटरों पर भी नजर

2027 का विधानसभा चुनाव देखते हुए युवा और पहली बार मतदान करने वाले वोटरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अखिलेश यादव पहले भी युवाओं और नई पीढ़ी के मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में CJP जैसे छात्र-युवा केंद्रित राजनीतिक मंच के साथ संवाद को इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक दोनों पक्षों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन या साझा आंदोलन की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इस मुलाकात को संभावित राजनीतिक सहयोग की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी।

क्या यूपी में नया मोर्चा तैयार होगा?

अखिलेश यादव और आशुतोष रांका की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्या दोनों संगठन शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर साझा अभियान चलाएंगे या यह केवल समर्थन और आभार तक सीमित रहेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी मुलाकात की पुष्टि की है। फिलहाल दोनों पक्षों ने किसी राजनीतिक तालमेल से इनकार किया है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले छात्र, युवा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर यह संवाद आगे किस दिशा में जाता है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।

Tags:    

Similar News