लखनऊ के बाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम में झुग्गियों में भीषण आग, काले धुएं से भर गया आसमान

गुरुवार को इंदिरापुरम के कनावनी इलाके में स्थित झुग्गियों में अचानक आग लग गई। शुरुआत में आग सीमित थी, लेकिन तेज हवा और घनी बस्ती के कारण यह तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही देर में आग ने कई झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया।;

Update: 2026-04-16 08:54 GMT

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। राजधानी लखनऊ के बाद अब गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में भी भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। कनावनी क्षेत्र में स्थित झुग्गी बस्ती में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिससे कई झुग्गियां इसकी चपेट में आ गईं। आग की ऊंची लपटें और आसमान में छाया काला धुआं दूर-दूर तक दिखाई दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

कनावनी की झुग्गियों में भड़की आग

जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को इंदिरापुरम के कनावनी इलाके में स्थित झुग्गियों में अचानक आग लग गई। शुरुआत में आग सीमित थी, लेकिन तेज हवा और घनी बस्ती के कारण यह तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही देर में आग ने कई झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका धुएं के गुबार से ढक गया। लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर बाहर भागने लगे।

लोगों में मची भगदड़, सामान जलकर खाक

आग लगते ही बस्ती में रहने वाले लोगों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। कई लोगों को अपना जरूरी सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला। इस हादसे में राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। अधिकतर लोग समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे। हालांकि, आग की चपेट में आकर कई परिवारों का पूरा सामान जलकर राख हो गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है।

दमकल की कई गाड़ियां मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को जानकारी दी। इसके बाद दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार मशक्कत कर रही हैं ताकि आग को फैलने से रोका जा सके। संकरी गलियों और झुग्गियों की घनी संरचना के कारण राहत और बचाव कार्य में कठिनाई आ रही है, लेकिन दमकल कर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं।

प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर तैनात

घटनास्थल पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी पहुंच गए हैं। पूरे इलाके को घेरकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। आसपास के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पाना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। साथ ही जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री उपलब्ध कराने की भी तैयारी की जा रही है।

आग लगने की वजह अभी साफ नहीं

फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस और फायर विभाग की टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि कहीं यह हादसा शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से तो नहीं हुआ। अधिकारियों का कहना है कि आग बुझने के बाद ही सही कारणों का पता लगाया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत जांच की जाएगी।

लखनऊ में भीषण आग

इसी बीच, राजधानी लखनऊ के विकासनगर सेक्टर-14 में बुधवार शाम एक और बड़ी आग की घटना सामने आई। रिंग रोड के किनारे स्थित झोपड़ी बस्ती में लगी आग ने भारी तबाही मचाई, जिसमें करीब 500 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं।

सिलिंडर फटने से बढ़ी तबाही

बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद बस्ती में रखे गैस सिलिंडरों में विस्फोट होने लगे, जिससे आग और तेजी से फैल गई। धमाकों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा और लोगों में दहशत फैल गई। घटना के समय बस्ती में रहने वाले करीब 2000 लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। चीख-पुकार के बीच लोग अपने बच्चों और परिजनों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश करते रहे।

दमकल की 20 गाड़ियों ने तीन घंटे में पाया काबू

लखनऊ की इस भीषण आग को बुझाने के लिए दमकल विभाग की करीब 20 गाड़ियों को लगाया गया। फायर कर्मियों ने करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। एहतियात के तौर पर आसपास के करीब 50 मकानों को खाली करा लिया गया और इलाके की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई, ताकि कोई और बड़ा हादसा न हो।

दोनों घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

गाजियाबाद और लखनऊ में हुई इन दो बड़ी आग की घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर झुग्गी-बस्तियों में आग लगने की घटनाएं तेजी से फैलती हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे इलाकों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है।

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