बसपा को यूपी नगर निकाय चुनाव ने दी संजीवनी

पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में हाशिये पर चली गयी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को नगर निकाय चुनाव ने संजीवनी दे दी है।

Update: 2017-12-02 12:58 GMT

लखनऊ। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में हाशिये पर चली गयी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को नगर निकाय चुनाव ने संजीवनी दे दी है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा “मोदी की आंधी” में उड़ गयी थी। राज्य में लोकसभा की कुल 80 सीटों में से उसे एक पर भी जीत नहीं मिल पायी थी। उसका खाता भी नहीं खुल सका था।

इस साल हुए राज्य विधानसभा चुनाव के बाद तो बसपा पूरी तरह हाशिये पर चली गयी थी। चार बार राज्य में सत्ता संभाल चुकी बसपा 403 विधानसभा क्षेत्रों में से मात्र 19 पर जीत सकी।

राजनीतिक गलियारों में माना जाने लगा था कि मायावती और उनकी पार्टी अब शायद ही आगे बढ़े, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव ने बसपा को संजीवनी दे दी। ‘केसरिया आंधी’ के बीच उसके दो मेयर जीतने में कामयाब हो गये।

अलीगढ़ और मेरठ में बसपा के मेयर चुने गये, हालांकि बसपा के बारे में कहा जाता है कि शहरी इलाकों में उसकी ताकत ग्रामीण अंचलों की अपेक्षा कम है। कुल 16 नगर निगमों में भाजपा के 14 मेयर जीते हैं। भाजपा और बसपा के अलावा किसी अन्य दल का मेयर पद पर खाता ही नहीं खुल सका।

नगर निगम, नगरपालिका परिषदों और नगर पंचायतों के सदस्यों के चुनाव में भी बसपा का प्रदर्शन सन्तोषजनक कहा जा सकता है। नगर निगम के पार्षदों के चुनाव में उसके 147 उम्मीदवार जीते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पार्षदों की कुल संख्या 1300 है, जिसमें 1298 के नतीजे ही घोषित किये गये हैं।

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