एनसीबी ने ओडिशा के कंधमाल और बौद्ध में गांजा की खेती पर अंकुश लगाने के अभियान में हिस्सा लिया

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ओडिशा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के मिशन जीरो कैनाबिस कल्टीवेशन के शुभारंभ में भाग लिया। यह अभियान कंधमाल और बौद्ध जिलों में शुरू किया गया है, जहां राज्य में अवैध गांजा की खेती सबसे अधिक होती है।;

Update: 2026-10-12 00:49 GMT

भुवनेश्वर। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ओडिशा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के मिशन जीरो कैनाबिस कल्टीवेशन के शुभारंभ में भाग लिया। यह अभियान कंधमाल और बौद्ध जिलों में शुरू किया गया है, जहां राज्य में अवैध गांजा की खेती सबसे अधिक होती है।

एनसीबी ने एक बयान में कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-29) के अनुरूप, इस मिशन का लक्ष्य मार्च 2027 तक दोनों जिलों में अवैध गांजा की खेती को समाप्त करना है।

एनसीबी ने आगे कहा कि इस अवसर पर, कंधमाल के काकेन्द्री गांव में लगभग 30 एकड़ में फैली अवैध गांजा की खेती को नष्ट कर दिया गया।

एनसीबी ने बताया कि इस अवसर पर कंधमाल के काकेन्द्री गांव में लगभग 30 एकड़ में फैली अवैध गांजा की खेती को भी नष्ट कर दिया गया। नशामुक्त भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करते हुए पंचायत सदस्यों सहित 500 लोगों ने सुद्रुकम्पा में 'नशा मुक्त' की शपथ ली, जबकि 500 ​​कॉलेज छात्रों ने फूलबानी में एक मिनी-मैराथन में भाग लिया।

इससे पहले, राजस्थान में इसी तरह की कार्रवाई में, एनसीबी जोधपुर, एएनटीएफ राजस्थान, और राजस्थान पुलिस की टीमों ने 'ऑपरेशन शंकर' नामक संयुक्त अभियान के तहत उदयपुर जिले की कोटरा तहसील के नयावास गांव में बड़े पैमाने पर अवैध गांजे की खेती का भंडाफोड़ किया था।

इस अभियान के दौरान, अधिकारियों ने 9.4 बीघा भूमि पर फैले लगभग 7,577 गांजे के पौधों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर दिया।

अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि इससे लगभग 2,273 किलोग्राम गांजा प्राप्त हो सकता है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 11.76 करोड़ रुपए है।

एनसीबी जोधपुर ने इस मामले में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

राज्य में अवैध मादक फसलों की खेती को खत्म करने के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

यह कार्रवाई मादक पदार्थों पर नियंत्रण के राष्ट्रीय विजन दस्तावेज के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासनों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों, निरंतर प्रवर्तन, रोकथाम उपायों और समन्वय के माध्यम से चिन्हित क्षेत्रों में दिसंबर 2027 तक अवैध भांग और अफीम की खेती को समाप्त करना है।

एनसीबी के एक बयान में कहा गया है कि राजस्थान ने निगरानी को मजबूत करके, राजस्व अधिकारियों पर रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी को और सख्त करके और संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवर्तन अभियानों को तेज करके मादक फसलों की अवैध खेती पर अपनी कार्रवाई को और कड़ा कर दिया है।

नए निर्देशों के तहत, पटवारियों को गिरदावरी के दौरान नियमित रूप से अपने अधिकार क्षेत्र का निरीक्षण करने और मादक फसलों की किसी भी संदिग्ध खेती की सूचना संबंधित गिरदावर और तहसीलदार को तुरंत देने का निर्देश दिया गया है।

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