ओडिशा में भाजपा खनन नीति के खिलाफ इंडिया गठबंधन का आंदोलन

ओडिशा में इंडिया गठबंधन ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की खनन नीति के खिलाफ मंगलवार को राज्यव्यापी प्रतिरोध आंदोलन का एलान किया;

Update: 2026-09-09 02:00 GMT

खनन लूट का ब्लूप्रिंट करार, कॉर्पोरेट कब्जे का आरोप

  • 29 सितंबर को विधानसभा घेराव का ऐलान
  • आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन अधिकारों की रक्षा की मांग
  • संशोधित खनन कानून को जन-विरोधी और असंवैधानिक बताया

भुवनेश्वर। ओडिशा में इंडिया गठबंधन ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की खनन नीति के खिलाफ मंगलवार को राज्यव्यापी प्रतिरोध आंदोलन का एलान किया।

गठबंधन ने इसे भाजपा सरकार का 'खनन लूट का ब्लूप्रिंट' और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों को सुनियोजित तरीके से कॉर्पोरेट हाथों में सौंपने की साजिश करार दिया है।

यहां गांधी मार्ग पर आयोजित एक संयुक्त राज्यस्तरीय जन सम्मेलन में घटक दलों ने भाजपा सरकार की खनन नीतियों के खिलाफ व्यापक राज्यव्यापी अभियान और जन लामबंदी की घोषणा की। नेताओं ने बताया कि इस अभियान के तहत पूरे ओडिशा में जागरूकता अभियान और जन सभाएं आयोजित की जायेंगी, जिसका समापन 29 सितंबर 2026 को राज्य विधानसभा के घेराव के साथ होगा। सम्मेलन में एमएमडीआर (संशोधन) अधिनियम, 2026 को रद्द करने, खनिज संसाधनों पर ओडिशा के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा करने और आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन एवं आजीविका के अधिकारों को सुरक्षित करने की मांग की गयी।

नेताओं ने आरोप लगाया कि संशोधित खनन कानून राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को कमजोर करता है तथा कॉर्पोरेट घरानों के खनिज संसाधनों के दोहन का रास्ता साफ करता है। उन्होंने विशेष रूप से धारा 9डी का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह धारा खनिज संसाधनों पर राज्य की कर लगाने और राजस्व जुटाने की शक्तियों को केंद्र की मंजूरी से जोड़ती है, जिससे वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित होती है।

खनिज समृद्ध जमीनों पर कर लगाने के राज्यों के संवैधानिक अधिकार को मान्यता देने वाले उच्चतम न्यायालय के 2024 के फैसले को याद दिलाते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि नये संशोधन इन अधिकारों को कमजोर करते हैं। उन्होंने दावा किया कि बकाया करों, उपकर और बकाये की वसूली पर सीमाएं लगाने से ओडिशा जैसे खनिज समृद्ध राज्यों को लाखों करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ सकता है।

नेताओं ने बिना खुली नीलामी के खनन पट्टों, कंपोजिट लाइसेंस क्षेत्रों और कैप्टिव माइनिंग क्षेत्रों के विस्तार की अनुमति देने वाले प्रावधानों का भी विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे बड़े कॉर्पोरेट घरानों को खनिज संसाधनों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। सम्मेलन में चेतावनी दी गयी कि पेसा और वन अधिकार कानून के तहत पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के अधिकार भी कमजोर हो सकते हैं।

नेताओं ने कहा कि ओडिशा में लौह अयस्क, बॉक्साइट और कोयले के विशाल भंडारों के कारण राज्य और स्थानीय समुदायों को भारी सामाजिक, पर्यावरणीय और जलवायु संबंधी नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि खनन का लाभ और मुनाफा केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों तक सीमित होता जा रहा है।संशोधित कानून को 'ओडिशा-विरोधी, जन-विरोधी, संघवाद-विरोधी और असंवैधानिक' करार देते हुए नेताओं ने केंद्र और ओडिशा की भाजपा सरकारों पर कॉर्पोरेट लूट को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के भाजपा सांसद ओडिशा के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

'ओडिशा के खनिज संसाधन ओडिशा की जनता के हैं' का नारा देते हुए इंडिया गठबंधन ने राज्य की प्राकृतिक संपदा पर कॉर्पोरेट कब्जे के खिलाफ इस अभियान को एक व्यापक जन आंदोलन में बदलने का संकल्प लिया।

श्री पंचानन कानूनगो ने मुख्य दस्तावेज प्रस्तुत किया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास की अध्यक्षता वाले अध्यक्षमंडल ने कार्यक्रम की कार्यवाही संचालित की। सम्मेलन के दौरान वामपंथी नेता संतोष दास की पुस्तक 'मोदीज ब्लूप्रिंट फॉर माइनिंग लूट' का विमोचन भी हुआ।

सम्मेलन में कांग्रेस, माकपा, भाकपा, भाकपा(एमएल) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और राजद ने भाग लिया।

Tags:    

Similar News