देव स्नान पूर्णिमा पर इस्कॉन भुवनेश्वर में श्रद्धा का सैलाब, 108 पवित्र कलशों से हुआ भगवान जगन्नाथ का महाअभिषेक
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित इस्कॉन मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा का पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया;
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर स्थित इस्कॉन मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा का पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, माता सुभद्रा और सुदर्शन चक्र का भव्य महाअभिषेक किया गया। 108 पवित्र कलशों के जल से भगवान का स्नान कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर दर्शन और पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में रंगा नजर आया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में उमड़ने लगी और पूरे दिन भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना तथा धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा।
इस्कॉन भुवनेश्वर के प्रतिनिधि आप्तकाम दास ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि देव स्नान पूर्णिमा का यह आयोजन जगन्नाथ पुरी की परंपरा के अनुरूप आयोजित किया गया। जिस प्रकार पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में स्नान यात्रा महोत्सव मनाया जाता है, उसी परंपरा का पालन भुवनेश्वर स्थित इस्कॉन मंदिर में भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगला आरती से हुई। इसके बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और सुबह 7 बजे श्रृंगार आरती संपन्न हुई। आरती के बाद भगवान को विशेष भोग अर्पित किया गया तथा पुजारियों ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन के वस्त्र परिवर्तन कर उन्हें स्नान यात्रा के लिए तैयार किया।
इसके बाद लगभग सुबह 10 बजे भगवान को पारंपरिक 'पहंडी' विधि के तहत स्नान वेदी पर विराजमान कराया गया। इसके पश्चात 11 से 11:30 बजे के बीच महाअभिषेक प्रारंभ हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान को 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया। अभिषेक के दौरान जल के साथ दही, घी, दूध, शहद और अन्य पवित्र सामग्री का भी उपयोग किया गया। यह संपूर्ण पूजा षोडशोपचार विधि के अनुसार संपन्न हुई।
उन्होंने बताया कि महाअभिषेक के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें पारंपरिक 'हाथी वेश' (गज वेश) में सजाया गया। इस विशेष वेशभूषा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। श्रृंगार के बाद भगवान को पारंपरिक 56 भोग अर्पित किए जाएंगे, जिसमें 56 प्रकार के व्यंजन भगवान को समर्पित किए जाएंगे। इसके बाद आरती होगी और फिर श्रद्धालुओं के लिए भगवान के दर्शन खोले जाएंगे। शाम को मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ के समक्ष भजन-कीर्तन और संकीर्तन का आयोजन देर रात लगभग 11 बजे तक चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त भगवान के नाम का संकीर्तन करेंगे।
उन्होंने आगे बताया कि स्नान यात्रा के बाद भगवान को 'अनसर घर' ले जाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान के बाद भगवान 15 दिनों तक अस्वस्थ रहते हैं। इस अवधि में उनकी विशेष सेवा की जाती है। इस दौरान भगवान को चावल का भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि केवल फल का भोग अर्पित किया जाता है। पुजारी पूरे विधि-विधान और परंपरा के अनुसार भगवान की सेवा करते हैं।