फर्जी बैंक लिंक भेजकर 8.5 लाख की ठगी करने वाले असम के तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार

ओडिशा की कमिश्नरेट पुलिस ने राष्ट्रीयकृत बैंक के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से 8.50 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के आरोप में असम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।;

Update: 2026-06-28 23:40 GMT

भुवनेश्वर। ओडिशा की कमिश्नरेट पुलिस ने राष्ट्रीयकृत बैंक के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से 8.50 लाख रुपये की साइबर ठगी करने के आरोप में असम के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान असम के नगांव जिले के रूपाहीहाट निवासी 29 वर्षीय हारुन रशीद तथा मोरीगांव जिले के लहरीघाट निवासी 22 वर्षीय जुनैदुर इस्लाम और 23 वर्षीय एजाजुल हक के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई भुवनेश्वर के साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस (सीसी एंड ईओ) थाने में दर्ज मामले संख्या 206/25 की जांच के दौरान की गई। यह मामला त्रिनाथ बाजार निवासी 64 वर्षीय बुलू दास की शिकायत पर दर्ज किया गया था।

शिकायत के अनुसार, सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी बुलू दास को नवंबर 2025 में कुछ लोगों ने फोन कर पेंशन के लिए लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने में मदद का झांसा दिया। इसके बाद 3 नवंबर 2025 को उनके मोबाइल पर यूको बैंक के नाम से एक फर्जी लिंक भेजा गया, जिसमें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का दावा किया गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि दास ने लिंक खोलकर मांगी गई जानकारी भर दी। इसके बाद उनके मोबाइल पर कई ओटीपी आए और कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से ऑनलाइन माध्यम से 8.50 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली गई।

ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस थाने में दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक रिकॉर्ड और केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया। यह गिरोह फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) और सिम कार्ड उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करता था।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी झारखंड के जामताड़ा से संचालित साइबर ठगी गिरोह के मुख्य सरगना कलीम अंसारी से जुड़े हुए हैं। कलीम अंसारी पहले से ही भुवनेश्वर के साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक अन्य मामले में वांछित है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी हारुन रशीद पेशे से फार्मासिस्ट है। उसने अपने सहयोगी परवेज आलम चौधरी के साथ मिलकर अलग-अलग नामों से बैंक खाते खुलवाए और सिम कार्ड हासिल कर उन्हें जामताड़ा स्थित सरगना कलीम अंसारी को सौंप दिया।

वहीं एजाजुल हक मोरीगांव जिले में म्यूल बैंक खाताधारकों की भर्ती करता था और अशरफुल नामक व्यक्ति के साथ मिलकर असम में फर्जी बैंक खातों की व्यवस्था करने वाले नेटवर्क का संचालन करता था।

पुलिस ने बताया कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों, जिनमें मुख्य सरगना कलीम अंसारी भी शामिल है, की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

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