नआईईटी में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एवं इंडस्ट्री समिट की शुरुआत
एआईसीटीई चेयरमैन प्रो. टी.जी. सीताराम ने प्रतिभागियों को किया उत्साहित
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एण्ड इंडस्ट्री समिट-2023 का आयोजन किया गया। समिट का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रो. टी.जी. सीताराम-अध्यक्ष-एआईसीटीई, प्रो. डॉ. चिन कुआन हो-वाइस चान्सेलर-एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी, मलेशिया और डॉ. आदित्य कुमार सिन्हा-निदेशक-सीडैक पटना, विशेष अतिथि डॉ. नेहा शर्मा और प्रो. अमलान चक्रबर्ती-कलकत्ता विश्वविद्यालय, डॉ. सरोजिनी अग्रवाल-चेयरपर्सन-एनआईईटी, डॉ. रमन बत्रा-ईवीपी-एनआईईटी, महानिदेशक प्रवीण सोनेजा, डॉ. विनोद एम कापसे-निदेशक-एनआईईटी, डॉ. अविजित मजूमदर की उपस्थिति में किया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. टीजी सीतारम ने उद्घाटन भाषण में नए विचारों और आविष्कारों को साझा करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग के लोगों को एक मंच पर लाने की एनआईईटी के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि वह एआईसीटीई आइडिया लैब, स्कूल ऑफ स्किल्स और मर्सिडीज बेंज के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को देखकर आश्वस्त हैं कि एनआईईटी बड़ी तेज गति से प्रगति कर रहा है।
प्रो. डॉ. चिन कुआन हो-वाइस चान्सेलर-एशिया पैसिफिक यूनिवर्सिटी, मलेशिया ने एनआईईटी के इस प्रयास की सराहना की और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीक के माध्यम से अपार संभावनाओं को संभव करने पर जोर दिया। डॉ. अदित्य कुमार सिन्हा-निदेशक-सीडैक पटना ने मानव जाति के प्रति संवेदनात्मक रूप से जुडते हुये इन्नोवेशन के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को न केवल उन्नत बनाने की आवश्यकता है, बल्कि उन्हे आम जन तक पहुँचाना भी होगा।
एनआईईटी की चेयरपर्सन डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने कहा कि भारतीय स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के क्षेत्र में शुरुआती दिनों से ही प्रगति दिखाई दे रही है। उन्होने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुये स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीक के प्रयोग से नए समाधान प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। एनआईईटी के ईवीपी डॉ. रमन बत्रा ने भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए एनआईईटी के दृष्टिकोण के बारे में चर्चा की।
निदेशक डॉ. विनोद एम कापसे ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। सम्मेलन की संयोजक डॉ. प्रियंका चंदानी ने सम्मेलन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस में 221 शोध पत्र प्राप्त हुए और समीक्षा के बाद 78 शोध पत्रों को प्रस्तुतियों के लिए चुना गया।