भर्ती से जुड़ी फाइल विभागीय सचिव को भेजने की तैयारी
जांजगीर ! आदिवासी विकास विभाग में भर्ती से जुड़े दस्तावेजों एवं कर्मचारियों की मांग को विभागीय सचिव के पास भेजने की तैयारी चल रही है,;
आदिवासी विकास विभाग में किश्तों में कर्मचारी नियुक्ति का मामला
जांजगीर ! आदिवासी विकास विभाग में भर्ती से जुड़े दस्तावेजों एवं कर्मचारियों की मांग को विभागीय सचिव के पास भेजने की तैयारी चल रही है, जहां से भर्ती सहित नियुक्त हुये कर्मचारियों द्वारा मांगे जा रहे एरियस आदि का फैसला होगा। यहां यह बताना लाजमी होगा कि विभाग के आश्रम शालाओं, छात्रावासों में जिले भर से करीब दो सौ कर्मचारियों की भर्ती रसोईया, भृत्य आदि की पदों पर तत्कालीन सहायक आयुक्त के कार्यकाल में वर्ष 2016 में किया गया है। इस भर्ती के तहत दैनिक मजदूरी दर पर कार्य करने वालों को नियुक्ति दी गई थी, जबकि इससे पूर्व उनके पास दैनिक मजदूरी कलेक्टर दर में नियुक्त करने का कोई आदेश नहीं था, जिसे लेकर उनके द्वारा हाईकोर्ट में वाद दायर कर आकस्मिकता निधि से नियुक्ति दिलाने व नियमितीकरण की मांग की गई थी। इस पर हाईकोर्ट द्वारा आदेश जारी कर नियमानुसार परीक्षण कर कार्रवाई का आदेश सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग जांजगीर को दिया गया था। उक्त आदेश को नियुक्ति का आधार बनाकर विभागीय समिति बनाते हुये पूर्व सहायक आयुक्त द्वारा करीब दो सौ कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी गई। इस नियुक्ति में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नियुक्त होने वाले सभी कर्मचारियों को एक साथ नियुक्ति न देकर अलग-अलग किस्त-किस्त में वर्ष 2016 के अलग-अलग महीनों में दिया गया है। वहीं नियुक्ति के पूर्व शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों जिसमें आरक्षण रोस्टर, स्थानीयता व अभिलेखों का परीक्षण कर विज्ञापन जारी न करते हुये सीधी भर्ती कर दी गई। जिसे लेकर अब अधिकारी बदलने के साथ ही राज खुलने लगे है। इसकी भनक विभाग को तब लगी जब इस दौरान नियुक्त कर्मचारियों ने एरियर्स सहित अन्य भत्तों की मांग रखी। उधर इस मामले से जुड़ी जानकारी की माने तो मध्यप्रदेश शासन की 1996-99 विभागीय नियम के तहत प्राथमिक आश्रम शाला, प्री मैट्रिक व पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में ग्राम सभा की प्रस्ताव पर बीईओ, जनपद पंचायत व जिला पंचायत द्वारा आवश्यकतानुसार भर्ती किये जाने का प्रावधान था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया। जिसके बाद यहां दैनिक मजदूरी में काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा कोर्ट में जाकर नियमित नियुक्ति व आकस्मिकता निधि से नियुक्ति दिलाने की मांग पर हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ द्वारा आदेश जारी कर नियमानुसार परीक्षण करते हुये कार्रवाई का आदेश विभाग को दिया गया था। कोर्ट के इसी आदेश का हवाला देकर अनेक अनियमितता बरते जाने का खुलासा हुआ है। जांजगीर-चांपा जिला में करीब दो सौ कर्मचारियों की नियुक्ति सितम्बर 2016 से पहले तक कर दी गई है। बहरहाल नियुक्त किये गये कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर विभाग से एरियस सहित अन्य सुविधाओं की मांग रखा है, जिस पर जिला आदिवासी विभाग को हाईकोर्ट का नोटिस मिलने के बाद वर्तमान सहायक आयुक्त ने भर्ती से जुड़े तथ्यों का अवलोकन कर भर्ती व मांग की दस्तावेज मंत्रालय रायपुर में भेजने का निर्णय लिया है, जिससे कर्मचारियों की मांग के साथ-साथ भर्ती की पारदर्शिता का फैसला विभागीय मंत्रालय के पाले में चला गया है।