त्रिपुरा में एक ही जगह होंगे 51 शक्तिपीठ मंदिर

त्रिपुरा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) सरकार ने 51 शक्तिपीठों का निर्माण करने के लिए 14.22एकड़ भूमि आवंटित की

Update: 2019-09-09 11:28 GMT

अगरतला । त्रिपुरा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) सरकार ने 51 शक्तिपीठों का निर्माण करने के लिए 14.22एकड़ भूमि आवंटित की है।
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तरह इसके लिए एक परियोजना तैयार की है।

अधिकारियों ने यहां सोमवार को बताया कि राज्य सरकार ने पहले से मौजूद पर्यटन संस्थलों का नवीनीकरण करने के अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कम लागत में कई कदम उठाये हैं। राज्य के पर्यटन विभाग ने हाल ही में देवतमुरा हिल्ल क्षेत्र में उनोकोटी पुरातात्विक स्थल के लिए हेलिकॉप्टर सेवा की शुरुआत की है। इन दोनों स्थलों पर 15वीं सदी की कई मूर्तियां मौजूद हैं।

शक्तिपीठ मंदिर हिंदू रिवाज के अनुसार एशिया के 51 स्थानों पर बनाये गये हैं और इन मंदिरों को मुश्किल से ही देश के लोग देख पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने माता त्रिपुरेश्वरी देवी मंदिर के पास उदयपुर के फुलकुमारी गांव में 51 शक्तिपीठ मंदिरों का निर्माण करवाने का फैसला लिया है।

राज्य के पर्यटन मंत्री प्रणजित सिंह रॉय ने बताया कि एशिया में स्थित 51 शक्तिपीठों में 38 शक्तिपीट भारत में, छह बंगलादेश में, तीन नेपाल, दो पाकिस्तान में और तिब्बत तथा श्रीलंका में एक-एक शक्तिपीठ मंदिर स्थित है। इस वजह से राज्य सरकार ने इन सभी शक्तिपीठों का निर्माण एक ही जगह पर कराने का फैसला लिया है।

उन्होंने कहा, “पर्यटन विभाग 51 शक्तिपीठों का निर्माण करवाने के लिए प्रारंभिक तौर पर 44 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है और इसे धन मुहैया करने के लिए 15वें वित्त आयोग के पास भेजा है। हमें उम्मीद है कि वित्त आयोग से यह राशि मिल जाएगी।”
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