चीन की शह पर पीएम के आत्मनिर्भर भारत मिशन में पलीता लगाने की साजिश है आंदोलन: मलेरना
प्रगतिशील किसान मोर्चा के नेता सुखबीर मलेरना ने केंद्र सरकार के कृषि से जुड़े तीन कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन को चीन की शह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत ' अभियान को विफल करने की साजिश करार दिया है
नयी दिल्ली। प्रगतिशील किसान मोर्चा के नेता सुखबीर मलेरना ने केंद्र सरकार के कृषि से जुड़े तीन कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन को चीन की शह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत ' अभियान को विफल करने की साजिश करार दिया है।
सुखबीर मलेरना ने मंगलवार को कहा कि तीनों कानूनों के विरोध में चलाए जा रहे किसान आंदोलन को कम्युनिस्टों ने पूरी तरह अपनी पकड़ में ले लिया है और इसका ठोस सबूत विवादित नेताओं की रिहाई जैसी मांग है जो कम्युनिस्ट एजेंडे का हिस्सा है। इसी एजेंडे के तहत कम्युनिस्ट आंदोलन को लंबा खींचना चाहते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिलकर श्री मलेरना कम्युनिस्टों द्वारा आंदोलन हथियाने पर विरोध जता चुके हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं चीनी मामलों पर बारीकी से नजर रखने वाले प्रवीण तिवारी का मत भी किसान नेता मलेरना से मेल खाता है। उनका मानना है कि यह कृषि कानूनों का विरोध नहीं है। लद्दाख के गलवान में भारतीय सैनिकों के साथ हुई झड़प के बाद मोदी सरकार के चीनी कंपनियों और बड़ी संख्या में ऐप्स पर लगाये गये प्रतिबंधों से पड़ोसी देश बौखला चुका है। इसकी वजह से हजारों करोड़ों रुपये के नुकसान ने चीन की कंपनियों की माली हालत खराब करनी शुरू कर दी है ।
आंदोलन के पीछे चीनी साजिश के अपने आरोप पर उदाहरण देते हुए श्री प्रवीण ने कहा कि चंद दिनों पहले तक मोबाइल और इंटरनेट के क्षेत्र में 5 जी इंटरनेट को लेकर दुनिया में एक ही नाम होता था- हुआवै। हुआवै चीनी सरकार की कंपनी है और यही भारत समेत ब्रिटेन और सभी देशों में 5जी का नेटवर्क लगाने वाली थी किंतु कोरोना महामारी के फैलने और चीनी खतरे की आशंका होते ही भारत, ब्रिटेन समेत पूरी दुनिया के देशों ने चीनी कंपनी को दिए गए 5जी तकनीक के अनुबंध रद्द कर दिए।
उन्होंने कहा कि रिलायंस जियो ने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर अभियान के तहत 5जी की स्वदेशी तकनीक विकसित की और इसका सफल परीक्षण भी किया है। इससे पहले 4जी तकनीक विकसित करने में जियो ने चीन को पूछा तक नहीं था। श्री प्रवीण ने कहा आंदोलन कृषि कानूनों के विरोध में है तो आंदोलनकारियों का किसी कंपनी के बहिष्कार के पीछे का मकसद साफ समझा जा सकता है।
प्रवीण तिवारी का कहना है कि दोनों देशों के विवाद से करीब 82 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। इसका चीन को बड़ा खामियाजा उठाना पड़ा है। दोनों देशों के बीच व्यापार में चीन से 65.3 अरब डॉलर का आयात भारत करता है और महज 16.6 डॉलर का निर्यात।
चीनी उत्पादों के लिये भारत एक बड़ा बाजार है। पड़ोसी देश यह भलीभांति जानता है कि यदि आत्मनिर्भर अभियान सफल हो गया तो उसके विश्व महाशक्ति बनने के सपने को बड़ा झटका लग सकता है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कई अन्य मंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि किसान आंदोलन की आड़ में कम्युनिस्ट और विदेशी ताकतों का एजेंडा चलाया जा रहा है।
सुखबीर मलेरना का कहना है कि चीन जानता है कि यदि इतने बड़े बाजार का विकास भारत ने अपने यहां किया तो उसे स्थायी नुकसान होने वाला है इसलिए वह आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसे प्रयासों को विफल करने की साजिश में जुटा है और तेजी से आगे बढ़ रही कंपनियों को निशाना बनवा रहा है।